Friday, 22 December 2017

आखिर क्या सम्बद्ध है श्रीकृष्ण जी की मृत्यु ओर जगन्नाथ पुरी मंदिर में

भारत देश की धरती देव भूमि कहलाती है। समय समय पर इस धरती पर कई अवतार अवतरित हुए है जिनमे से एक श्री कृष्ण जी भी है। आज हम आपको भगवान जगन्नाथ की मूर्ति और भगवान श्रीकृष्ण की मौत से जुड़ा एक रहस्य बताने जा रहे है।

हिन्दू धर्म के बेहद पवित्र स्थल और चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी की धरती को भगवान विष्णु का स्थल माना जाता है। जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक बेहद रहस्यमय कहानी प्रचलित है। मान्यताओं के अनुसार मंदिर में मौजूद भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्वयं ब्रह्मा विराजमान हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मा भगवान कृष्ण के नश्वर शरीर में विराजमान थे। भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु के बाद पांडवों ने उनके शरीर का दाह-संस्कार कर दिया। श्री कृष्ण जी का शरीर तो राख में तब्दील हो गया लेकिन दिल (पिंड) जलता ही रहा। ईश्वर के आदेशानुसार उस पिंड को पांडवों ने जल में प्रवाहित कर दिया। जल में प्रवाहित होने पर पिंड ने लट्ठे का रूप ले लिया।

राजा इन्द्रद्युम्न जो कि भगवान जगन्नाथ के भक्त थे उनको यह लट्ठा मिला और उन्होंने इसे भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर स्थापित कर दिया। तब से लेकर आज तक वह लट्ठा भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के भीतर है। हर 12 वर्ष के अंतराल के बाद भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बदलती है लेकिन यह लट्ठा उसी में रहता है।

इसमे एक हैरान करने वाली बात यह भी है कि यह मूर्ति हर 12 साल में एक बार बदलती तो है लेकिन उस लट्ठे को आज तक किसी ने नहीं देखा। मंदिर के पुजारी जो इस मूर्ति को बदलते हैं उनका कहना है कि उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी जाती है और हाथ पर कपड़ा ढक दिया जाता है। इसलिए वे ना तो उस लट्ठे को देख पाए हैं और ही छूकर महसूस कर पाए हैं। पुजारियों के अनुसार वह लट्ठा इतना सॉफ्ट होता है मानो कोई खरगोश उनके हाथ में फुदक रहा है।

मान्यताओं के अनुसार अगर कोई व्यक्ति इस मूर्ति के भीतर छिपे ब्रह्मा को देख लेगा तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसी वजह से जिस दिन भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बदली जाती है उस दिन उड़ीसा सरकार द्वारा पूरे शहर की बिजली बाधित कर दी जाती है। इस प्रकार यह बात आज तक एक रहस्य ही है कि क्या वाकई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में ब्रह्मा का वास है।

No comments:

Post a Comment

खूनी घाटी part 2

दूसरी तरफ का नज़ारा देख कर सब हैरान रह गए। चारो तरफ एक खामोशी सी छाई हुई थी। पेड़ थे,हरियाली थी ,पशु पक्षी भी थे लेकिन जैसे सबने मौन धारण कर र...