Tuesday, 12 September 2017

वो चीख

उस सन्नाटे को चीरती हुई एक आवाज़  आई ....बचाओ .....बचाओ...तभी योगी भाई उस आवाज़ की दिशा में दौड़ पड़े।बदहवास से उस दिशा की तरफ दौड़े जा रहे थे की अचानक से योगी भाई को वहा पे जाना पहचाना चेहरा नज़र आता है, उस चेहरे को देख कर योगी भाई की आँखों में खून उत्तर जाता है,इतना बड़ा धोखा उनके साथ,उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।
अचानक से योगी भाई का हाथ उनकी पेंट की जेब की तरफ गया,और फिर उन्होंने एक झटके से गोल्ड फ्लैक का पैकेट निकाला,उसमे से एक सिगरेट निकाल कर उसे अपने लबो के हवाले कर दिया।
योगी कश पे कश खीचते हुए इसी कशमकश में था की अब आगे जाए या नही। उधर दूसरी तरफ मनीष और प्रेम योगी का फ़ोन मिला मिला कर थक गए थे। वो समझ नहीं पा रहे थे की अचानक से योगी कहा गायब हो गए।
उन दोनों के चेहरे पे डर की रेखाएं साफ साफ नज़र आ रही थी।
तभी मनीष की आँखों में चमक सी उठी और उन्होंने जल्दी से अपने फ़ोन को टटोला और एक नंबर मिलाया "चुना आयुक्त बाबाजी"
उन्हें यकीं था की अब बाबाजी के इलावा कोई और उन्हें इस मुसीबत से नही निकाल सकता।
उधर प्रेम गाड़ी की सीट पर चिंतामग्न से बैठा हुआ था। अचानक उन्हें एहसास हुआ की कही से घर्र घर्र की आवाज़ आ रही है। डर के मारे वो दोहरा हो गया। इस बियाबान में क्या क्या हो सकता है कही कोई भुत प्रेत,नही नही,उसने झट से पानी की बोत्तल निकली और मुह  से लगा कर गटागट खाली कर दी।
थोड़ी दुरी पर खड़ा मनीष फ़ोन कंपनी पर गुस्सा निकाल रहा था। नेटवर्क था की मिलने का नाम ही नही ले रहा था।
मनीष ने सिगरेट जलाई और धुँआ छोड़ते के साथ ही चार पांच गालिया बक दी कंपनी वालो को। वो परेशान सा गाड़ी की तरफ को चल पड़ा।
वहा से तक़रीबन 2000 किलोमीटर दूर दिल्ली में कुमार साहब गवर्मेंट को कोसते हुए, फ़ाइल को संभाले गलियो में घूम रहे थे। उन्होंने अपना हाथ अभी ऊपर उठाया ही था पसीना पोछने के लिए की उनका फ़ोन जो की वाइब्रेशन पे था नाच उठा।उन्होंने जल्दी से पसीना पोछा और फ़ोन उठाया, हेल्लो बोलते ही उधर से एक मरदाना आवाज़ गूंजी।
ये हमारे सोनी साहब थे,फिर उनके बीच कुछ बाते हुई। फ़ोन रखने के बाद उन्होंने फटाफट अपने साथी भल्ला जी को फ़ाइल देते हुए कहा। भल्ला जी मुझे जाना होगा आप सब संभाल लेना।कुमार जी ने गाड़ी की तरफ दौड़ लगा दी।
गाड़ी सड़को पे सरपट दौड़ती जा रही थी।ऐसा लग रहा था मानो जैसे आज गाड़ी को पंख लग गए है।
उधर बियाबान में योगी  का विवेक जवाब दे चूका था। ऐसा वाकया उसके साथ पहली बार हो रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई चलचित्र चल रहा है। वो कभी उस तरफ देखते फिर अपनी आँखें मल लेते, योगी को अपने बदन में इक सिरहन सी महसूस हो रही थी। वो भाग जाना चाहते थे लकिन भाग नही पा रहे थे।
उनका बदन जैसे जड़ हो गया था और धिरे धिरे शिथिलता की और जा रहा था।
वो मन ही मन उस घडी को कोस रहे थे जब वो उस चीख के पीछे भागे और देखो कहा फस गए।
उधर मुम्बई में चुना वाले बाबाजी ने पान की पीक को थूका और फ़ोन निकाला, साथ साथ वो कोई भोजपुरी गाना गुनगुना रहे थे।
थारे पीछे चाली रे गोली शामियाने में।
मोबाइल देखते ही उनका पान वाला मुह खुला का खुला रह गया।।22 मेसेज।ओ थारी के। वो बड़बड़ाये।
21 मेसेज मिस कॉल के नंबर देखा ""मनीष"""
22 वा मेसेज देखते ही हड़बड़ाहट में उन्होंने पूरा पान ही निगल लिया, जल्दी जल्दी उन्होंने दुकान बड़ाई और दौड़ लगा दी। आज हर कोई भाग रहा था।
उन्होंने जल्दी से रजत को फ़ोन लगाया और बोला,
ओये गरीब आदमी। देल्ही पहुच रहा हु जहाज से।कुमार जी को फ़ोन लगाओ और मिलो मुझे हवाई अड्डे पर दोनों।
और हा सब काम छोड़ दे बात बहुत सीरियस है।
रजत इससे पहले कुछ पूछता  फ़ोन कट दूसरी तरफ से। रजत ने जल्दी से ऑफिस से छुटी ली और निकल पड़ा कुमार जी की तरफ।
उधर राजस्थान में पायल बेचनी में इधर उधर घूम रही थी। उसे परेशान देख टीना जो की उससे मिलने आई हुई थी,ने पूछा क्या हुआ।
पायल ने मरी सी आवाज़ में बोला।
उनका नंबर नही लग रहा अब किसी का भी नही। ऐसा आज तक नही हुआ।
मुझे घबराहट हो रही है।टीना ने उसे दिलासा दिया और जैसे ही पायल के लिए पानी लेने के लिए चली वो जोर से चिला पड़ी और बुरी तरह घबरा गयी वो और फिर पायल ने वहा देखा उसे कोई परछाई सी दिखाई पड़ी। कमरे में परछाई लकिन किसकी वो दोनों बुरी तरह घबरा गई,
तभी मोनू, पायल का बेटा हाथ में टोर्च लेकर दोडता हुआ आया, उसकी रौशनी में उसकी परछाई बड़ी भयानक लग रही थी। ये देख कर दोनों के दिल को सुकून मिला। पायल ने मोनू को अपने गले से लगाया और प्यार से चपत लगाते हुए बोली। बेटा शैतानी नही करते।
दिल्ली में कुमार जी और रजत बाबाजी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे।
उनकी फलाइट लैंड हुए 5 मिनट हो गए थे तभी कुमार जी ने उन्हें आते हुए देखा और अपना हाथ हिला दिया। बाबाजी झटपट भागते हुए आये और वो तीनो गाड़ी की तरफ चल पड़े।
गाड़ी में बैठते ही बाबाजी ने कुमार जी से पूछा। गुरूजी से बात हुई। कुमार जी ने ना में सर हिला दिया। फिर अब कैसे करे बाबाजी बोले, चलो चलते है वही पर गुरूजी को मेसेज छोड़ दिया है देखते ही बात करेंगे।
तीनो के चेहरों पर हवाइया उडी हुई थी
तभी बाबाजी ने बीड़ी सुलगाई और धुँआ के लिए गाड़ी का शीशा खोल दिया। उनके दिमाग में कई विचार आ जा रहे थे। वो गहरी सोच में डुबे थे।
अचानक फ़ोन की घंटी से उनकी तन्द्रा भंग हुई। नंबर देखा तो पायल का था।
उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई लकिन चिंताओं ने उस मुस्कान को पल भर में कही दफ़न कर दिया।
उन्होंने फ़ोन उठाया और पायल को सारी बात बताई।
जाहिर था की वो परेशान हो रही होगी क्योकि मनीष का नंबर नही लग रहा,साथ ही साथ योगी और प्रेम का।तीनो के नंबर एक साथ न लगना किसी न किसी खतरे की तरफ इशारा था और तो और उनके पास भी सिर्फ इतना मेसेज आया था की
बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। तभी वो भाग लिए थे और उन्होंने कुमार जी को भी फ़ोन कर दिया था।
क्योकि जिस एरिया में वो गए थे वो बहुत ही खतरनाक था। बाबाजी ने उन्हें धयान रखने को बोला था लकिन ये सब कैसे हुआ। वो सोच विचार में पड़े थे। कुमार जी ने अचानक जोर से ब्रेक लगाई।बाबाजी पीछे की सीट से गिरते गिरते बचे। सामने देखा तो एक छोटा सा कुते का पिल्ला।
रजत ने फुर्ती से गाड़ी का दरवाजा खोला और उसको उठा लिया। उसे पैर पर गाड़ी के टायर की वजह से हलकी सी खरोंच थी।
ये सड़क में बीच कहा सा आ गया। बोला रजत। आसपास सुनसान इलाके को देखते हुए कुमार जी बोले। ये तो पता नही लेकिन यहाँ आसपास कोई बस्ती भी नही दिख रही। अगर इसको यही छोड़ा तो कही मर न जाये।
दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा और सहमति हो गयी पिले को साथ रखने की।
कुमार जी ने उसे बाबाजी के हवाले किया और गाड़ी का स्टेयरिंग संभाल लिया।
बाबाजी दिल के बड़े नरम है उन्होंने उसे पानी पिलाया अपने हाथ में लेकर फिर अपना रुमाल निकाल कर उस पिल्लै के पैर पर बांध दिया।
पिले ने बड़ी मासूमियत से उनकी तरफ देखा और उनके हाथो को चाटने लगा जैसे शुक्रिया अदा कर रहा हो। और अचानक से बाहर बिजली कड़की,
मौसम ने करवट बदली,घने बादल घिर आये शायद भारी बूंदा बांदी हो सकती है कुमार जी बाबाजी के मुखाबित होते हुए बोले,हा शायद बाबाजी बाहर का मौसम देखते हुए बोले।
लेकिन अचानक से इस प्रकार मौसम का बदलना कही न कही कुमार जी को हैरान कर रहा था।वहाँ उधर उस बियाबान में मनीष और प्रेम परेशानियो में गिरे थे।
उन्हें ये भी मालूम ना था की कोई आ रहा है या नही।
मनीष ने गाड़ी की पीछे की सीट से बड़े वाला मयूर जग खोल कर बियर निकाली। ज्यादा ठंडी तो नही लकिन काम चल जायेगा प्रेम से बोला उन्होंने।
प्रेम ने बियर को देख कर मुह बिचकाया।
और मनीष ने बियर को मुह से लगाया।
उनको समझ नही आ रहा था की वो यहाँ योगी का इंतज़ार करे या उनको ढूंढे या फिर बाबाजी का इंतज़ार करे।
क्या पता उन्हें मेसेज मिला भी होगा या नही।
इसी कशमकश वो कब दो बियर पी गया उसे पता ही नही चला।
योगी वहा बेसुध सा था। वहाँ का मंजर ही ऐसा था। कोई और होता तो शायद प्राण छोड़ देता लेकिन योगी  जीवट वाले थे जो अभी तक झेल रहे थे। ये अलग बात थी की उनका शरीर साथ नही दे रहा था सिर्फ आँखें ही झपक रही थी।
अभी और कितना टाइम बाबाजी ने कुमार जी से पूछा। बस यही कोई 2 घंटे में पहुच जायेगे। ये इलाका था देल्ही से आगरा वाले रोड पर जहा 3 किलोमीटर का एरिया के बाद इक सड़क जाती है जंगल में। वहाँ आसपास के लोग जाते नही थे। लकिन मनीष ने जल्दी के चक्कर में गाड़ी वहाँ से निकाल दी लेकिन उसको क्या पता कि जल्दी के चक्कर मे वही अटक जाएंगे। मनीष ने अपनी बियर की बोतल फैंकी ही थी कि अचानक से एक चीख सुनाई दी उसने आव ना देखा ताव ना देखा और एक तरफ को दौड़ लगा दी। जब तक प्रेम उसको रोकता वो भी जंगल में कही गुम हो गया। प्रेम अपने आप को अकेला पाकर ओर घबराने लगा वक़्त भी करवट बदल रहा था। हल्का हल्का अँधेरा गिर रहा था और प्रेम समझ नही पा रहा था की वो करे तो क्या करे।वो जंगल में जाये या इंतज़ार करे। इसी उधेड़बुन में कितना वक़्त गुजर गया।
अचानक से प्रेम को कुछ नज़र आया और उसने उस तरफ दौड़ लगा दी।

उधर बाबाजी को बेचैन होते देख रजत ने पूछा क्या हुआ बाबाजी कुछ परेशान लग रहे हो। बाबाजी ने मुह बिचकाते हुए बोला यार कुछ नही वो सूजी हुई है बैठने में परेशानी हो रही है अगर कोई होटल हो तो रोको कुछ देर।
ये सुनते है कुमार बाबू की हंसी छुट पड़ी।
अपने शायराना अंदाज़ में बोले वे।
"गर इतना सताओगे घरवाली को बशर
सुजायेगी नही तो क्या संभालेगी"
ये सुनते ही रजत का हंस हंस कर बुरा हाल हो गया। कुछ देर बाद कुमार जी ने एक जगह गाड़ी रोकी।बाबाजी झटपट पिछवाड़े पे हाथ फेरते हुए उतरे और
बोले ससुरी सूज गयी है।
कुमार जी ने कुछ खाने का आर्डर किया और कुछ पैक करवाया तक़रीबन 20 मिनट के बाद वो वहाँ से निकल लिए लेकिन बाबाजी को चैन नही आया,क्योकि उनकी सूजी जी हुई थी।बाबाजी की सूजी हुई थी परेशान हो रहे थे बेचारे बड़बड़ा रहे थे चूसी को मना किया था मत जाओ वहा ना करो पीछा उस नागिन का कहा फंसा दिया सबको।
चूसी को गायब हुए 72 घंटे हो गए थे और उसको ढूढने के चक्कर में एंडी,अनिल गायब हो गए। उनको ढूढने गए मनीष,प्रेम और योगिराज का कोई पता नही।
किसी से कोई संपर्क नही और तो और पायल और टीना का रो रो कर बुरा हाल हो रहा था। गुरूजी से कोई कांटेक्ट नही हो रहा था।क्या करे सब समझ से बाहर।
क्या हुआ ? कुमार जी ने पूछा'
कुछ नही बाबाजी बोले,बस सोच रहा था इस धीरू ने कहा फंसा दिया अरे पेड़ पौधे, मेंढक तक तो सही था किसने कहा था नागो का पीछा करो सब गायब।
पता नही हमारे भाई मनीष,प्रेम और योगी किस हाल में होंगे।
जब भी मिला ससुरा तो इसके पिछवाड़े में जमके लात लगाने का है बाबाजी गुस्से में बोले। तभी रजत बोला, काहे को चिंता करते हो हमारे औघड़दानी जी का आशीर्वाद हमारे साथ है कुछ नही होगा किसी को।
बाबाजी को तसली हुई सुन कर सब ने मन ही मन गुरुदेव का ध्यान किया।
अचानक कुमार जी ने जोर से ब्रेक लगाये गाड़ी के लकिन फिर भी गाड़ी किसी साये से टकरा गयी अँधेरा था तो कोई समझ नही पाया क्या हुआ। कुमार जी को किसी के कराहने की आवाज सुनाई दी जिससे ये तो पक्का हो गया की कोई मानव है।गाड़ी से कोई उतरने को तैयार नही एक डर अभी उनके मन में समाया हुआ था की कही ये कोई खेल तो नही है जिसमे वो सब फंस जाये।
गाड़ी में से किसी की उतरने की हिम्मत नही हो रही थी। सब खामोश बैठे थे कोई आवाज़ नही क्योकि वो उस इलाके में आ चुके थे जहा उनके बाकि मित्र गायब हो गये थे। लेकिन किसी न किसी को तो पहल करनी थी। कुमार जी ने बाबाजी की तरफ देखा। बाबाजी ने जेब से पान निकाल कर मुँह में ठूसा और बाहर को चल दिए। सधे कदमो से वो उस साये के पास पहुंचे और और जोर से चिलाये।
प्रेम भाई। उनकी आवाज़ सुन कर कुमार बाबू और रजत भी वहा दौड़े दौड़े पहुंचे।
कुमार बाबू के चेहरे पर हवाइया उड़ने लगी की कही उनकी वजह से प्रेम भाई,
तभी रजत ने प्रेम भाई की बाजु टटोली और एकदम से छोड़ दी ये देख कर बाबाजी और कुमार बाबू की रही सही हिमत भी जवाब दे गयी। सभी परेशानियों के भंवर में फस गए तभी अचानक से कुमार बाबू ने एक रोशनी देखी उनकी जान में जान आई की शायद कोई राहगीर हो उनकी मदद कर दे।
जैसे ही वो रौशनी करीब आई कुमार जी ने देखा वो हौंडा सिटी गाड़ी थी।
उसने से एक साया उतरा और उनकी तरफ बढ़ने लगा,जैसे ही वो साया करीब आया ये क्या कुमार बाबू को झटका लगा ये तो सोनी साहब थे।
जिन्होंने सबसे पहले फ़ोन किया था उन्हें जब उनके पास प्रेम का मेसेज आया की यहाँ फंस गए कुछ मदद कीजिये और उन्होंने कुमार जी को सूचित किया।
सोनी जी करीब आये और उन्होंने प्रेम को देखा बोले, क्या हुआ प्रेम भाई को।
लकिन कोई जवाब नही।
सोनी जी ने गुस्से से दुबारा पूछा तो रजत ने सारी कहानी बता दी।
सोनी जी झटपट प्रेम भाई के पास गए और उनकी नब्ज टटोली। ये तो जिन्दा है वो ख़ुशी से चिलाये।
सबकी आँखे उस वक़्त नम हो गयी और सब भागे प्रेम भाई की तरफ।
इधर बाबाजी का चेहरा गुसे में भर गया पान थूकते ही वो बोले रजत से बुड़बक हो का,इत भी मालूम न आदमी जिन्दा है यो नही।
नब्ज तो ऐसे टटोलने गए थे जैसे बड़े डॉक्टर हो बुड़बक आदमी।
तुम्हारे पिछवाड़े पे दै दुइ चार लात
ससुरा।
उन सबके कानो में आवाज़ पड़ी। ये प्रेम भाई की आवाज़ थी शायद उनको होश आ गया था।
सब ने सवालो की झड़ी लगा दी तभी बाबाजी चिलाये और चारो तरफ शांति।
बाबाजी ने प्रेम भाई को सहारा दिया और पानी पिलाया।प्रेम भाई कुछ बोल नही पा रहे थे।
बाबाजी ने उन्हें कुछ खाने को दिया ये शायद कबाब थे खाने को देखते ही प्रेम भाई ऐसे टूट पड़े जैसे बरसो से कुछ खाया ना हो। कुछ ही पलो में उन्होंने कबाब और फ्राइड चिकेन को निपटा दिया पानी पिया तब जाकर कुछ सयंत हुए।
क्या हुआ था वहाँ कुमार बाबू ने बाबाजी की तरफ देखते हुए धीरे से पूछा।
शायद वो डर रहे थे की कही बाबाजी के प्रकोप का शिकार न हो जाये।
प्रेम ने उन्हें एक ही साँस में सारी कहानी बयां कर दी कैसे योगी गायब हुए फिर अचानक से मनीष भी बियर पीता हुआ जंगल में भाग गया।
ये सुनकर सबके माथे पे शिकन की रेखाएं खीच गयी।अब कैसे करे? जैसे प्रेम भाई ने बताया उससे तो यही पता चलता है कुछ तो अजीब है।
गुरूजी से कोई वार्तालाप नही हुआ अब करे तो क्या। सभी सोच में डूबे थे की अँधेरे को चीरती एक चीख ने उनकी रूह तक उनकी रूह तक को कंपकंपा दिया।सब भागे गाड़ी की तरफ और चारो दरवाज़े लॉक कर लिए। अब क्या करे रजत बोला कछु समझ नही आ रहा बाबाजी मुह में बीड़ी लगाते हुए बोले।
प्रेम की तो आवाज़ ही नही निकल रही थी उधर कुमार बाबू जहां चिंतन में डूब गए थे। सब वक़्त को कोस रहे थे लकिन कर भी क्या सकते थे। हर इंसान तो ऊपरी चीज़ों से मुकाबला नही कर सकता हर पत्थर तो पानी में नही तैर सकता।कुमार जी तन्द्रा भंग करते हुए बोले ।
आखिर कब तक हम ऐसे ही बैठे रहेंगे। हमारे गुरूजी का आशीर्वाद हमारे साथ है हमे अपने मित्रो को ढूंढना चाहिए।माना गुरूजी से कोई संपर्क नही लकिन वो खुद ब खुद जान जायेंगे हम किस हालात में है।
वो आएंगे जरूर आएंगे। क्यों बाबाजी?
कुमार बाबू उनके मुखाबित होते हुए बोले। जी सही फ़रमाया आपने बाबाजी अपने सूजे पिछवाड़े को सहलाते हुए बोले।
सभी ने हिमंत दिखाई बाहर जाने की तभी एकाएक वो श्वान भोकने लगा। वही पिल्ला जिसे कुमार जी और रजत ने अपने साथ ले लिया था।
पुरे रस्ते उस श्वान ने आवाज़ तक नही की फिर एकाएक भोकना वो भी लगातार।
सब सोच में पड़ गए की अचानक से ऐसा क्या देख लिया इस श्वान ने।
तभी बाबाजी को कुछ याद आया और वो बोले, श्वानों की देखने की शक्ति हमसे ज्यादा होती है वो उसको भी देख लेते है जिसे हम साधारण मानव नही देख सकते।
उनकी बात सुनते ही कुमार जी ने गाड़ी के डैश बोर्ड से एक पोटली निकाली।
ये क्या है रजत ने पूछा?
सिन्दूर,हनुमान जी के बाये कंधे का इसे सब लगा लो फिर हमारे भीतर प्रेतो का डर नही रहेगा। ये हमारे डर पर ही हावी होते है।सबने मन ही मन हनुमान जी को याद किया और सिन्दूर को अपने माथे पे लगाया।
सबके अंदर एक जोश सा आ गया जैसे उनकी ताकत में इज़ाफ़ा हो गया।
सबने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और बाहर को निकल लिए गाड़ी से साथ में वो श्वान भी।अपने दोस्तों के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हुए सब एक दूसरे का हाथ थामे उस अँधेरे जंगल की तरफ चल दिए।
उधर पायल और टीना का बुरा हाल था।रो रो कर अपनी खूबसूरत आँखे सुजा ली उन दोनों ने।अजीब हालात थे।
तभी पायल ने अपना फ़ोन निकाला और सभी का नंबर लगाया सिर्फ एक नंबर मिला लकिन कोई जवाब नही। हमारे संजय भाई शायद कही बिजी थे।
अगला नंबर शुभम दादा का था।
पहली ही रिंग में उन्होंने फ़ोन उठा लिया
पायल ने एक साँस में उन्हें सारी कहानी बता दी और बोला की वो दिली आ रही है। अब गुरूजी ही कुछ कर सकते है
पायल और टीना देल्ही के लिए निकल पड़े। पायल ने बेटे को अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ छोड़ दिया।
उन्होंने हवाईजहाज का टिकट लिया और उनका देल्ही का सफर शुरू। देल्ही लैंड करते ही पायल का फ़ोन बजा देखा तो संजय का फ़ोन था।
फिर एक बार संजय को पायल ने पूरी बात बताई। संजय ने झटपट गाड़ी लेकर पहुच गए और शुभम को भी साथ ले लिया। उनकी मंजिल थी गुरूजी।
तक़रीबन 1 घंटा देल्ही  के ट्रैफिक में गुजारने के बाद वो गुरूजी के घर पहुंचे लकिन ये क्या वहा तो कोई नही।नंबर लगाया तो बंद।
अब उड़े सबके होश गुरूजी के इलावा उन्हें कौन बचा सकता है। चलिए घर चलते है बाद में आ जायेंगे संजय बोला लेकिन पायल वहाँ से नही हिली।
हम यही गुरूजी का इंतज़ार करेंगे वो बोली टीना ने भी समर्थन किया इस बात का।
वो वापिस गाड़ी में बैठ गए और संजय नाश्ते पानी का इंतज़ाम करने चले गए।
शुभम वही रुक गया।
थोड़ी देर में संजय पॉलीथिन के बैग पकडे हुए वापिस आये।
एक में छोले भुटुरे थे,कोल्ड ड्रिंक और कचोरी थी।
किसी का खाने का मन नही था लेकिन शुभम के समझाने पर सबने बुझे मन से खा लिया।
उधर जंगल में कुमार जी,सोनी साहब,बाबाजी,और प्रेम सब आगे बढे जा रहे थे। जिस तरफ मनीष भागा था।
कमाल की बात ये थी की वो श्वान अब आगे आगे चल रहा था जैसे उसे पता हो कहा जाना है।
जैसे वो उन सबका मार्गदर्शन कर रहा हो। कुछ 45 मिनट चलने के बाद उन्हें कुछ नीली सी आभा लिए रौशनी दिखाई दी। वो सब दौड़ चले उस तरफ। जैसे ही वो वहा पहुंचे वहा का मंजर देख सबके होश फाख्ता हो गए। उनके शारीर जैसे जड़ हो गए। चारो तरफ नाग ही नाग काले कुछ सुरमई से रंग के,कुछ छोटे तो कुछ इतने बड़े की अगर सीधे खड़े हो जाये तो 10 फिट तक ऊपर जाए।
ऐसा ख़ौफ़नाक मंजर देख कर उनके दिलो ने जैसे धड़कना ही बंद कर दिया।
तभी रजत की निगाह ऊपर पड़ी और वो खुद को संभाल नही पाया गिर पड़ा।
बाबाजी ने उसे उठाया और पूछा क्या हुआ उसने ऊपर की तरफ इशारा कर दिया। उस मंजर को देख कर तो बाबाजी और कुमार जी की सिटी पिटी ग़ुम हो गयी।
रजत तो डर के मारे जैसे पगला गया था।उसने पास से एक लकड़ी उठाई और आगे की और भाग लिया इससे पहले की बाबाजी उसे रोकते वो 10 कदम भागते ही गिर पड़ा।
उसके गिरते ही अनेको सांप उसकी तरफ लपके ओर उसको जकड़ लिया और देखते ही देखते उसे भी पेड़ के ऊपर उल्टा टांग दिया। जहा उनके सभी मित्र जिनको वो खोज रहे थे टंगे हुए थे।
एक बात समझ नही आ रही हम दोनों को कुछ नही हुआ सिर्फ रजत।बाबाजी बोले। कुमार जी ने ध्यान से देखा और बाबाजी को इशारा किया। जमीन पर नीली रौशनी से जैसे घेरा काढ़ा हुआ था रजत भयवश उसे पार कर गया शायद इसीलिये।
ये किसी तरह की घेराबंदी हो कुमार जी बोले। हो सकता है बाबाजी ने उनका समर्थन किया।
अचानक से आकाश में कुछ सफ़ेद सी रोशनियां सी चमकने लगी वो धीरे धीरे नीचे आते हुए एक गोल घेरा बन गयी।उस रौशनी ने बाबाजी और कुमार जी को अपने अंदर समा लिया।
दोनों के चेहरे पर डर हावी हो गया अंदर उन्होंने प्रेम भाई को देखा।वो बेसुध थे शायद भयवश तभी एक आवाज़ गूंजी " अलख निरंजन"

ये आवाज़ सुनते ही दोनों के दिल में हर्ष की लहर दौड़ गयी। गुरूजी आप कहा है बाबाजी ने आवाज़ लगाई,यही तुम्हारे पास अब डरना नही है बिलकुल।आवाज़ फिर से आई।
कुमार जी और बाबाजी का मस्तक झुक गया और उनकी आँखों से पानी बहने लगा। ये प्रेम था अपने गुरु जी के प्रति उन दोनों का। महान थे गुरूजी जो वहा न होते हुये भी वहा थे।
तभी उस सफ़ेद रौशनी से एक रौशनी अलग हुई और उसने एक आकार धारण कर लिया। कुछ मन्त्र हवा में घुलने लगे और सब नाग अलोप हो गए।
सभी मित्र जो पेड़ पर टंगे थे नीचे आने लगे और जमीन से स्पर्श करते ही एकदम स्वस्थ हो गए।
सबने एक दूसरे को देखा और गले से लगाया सबकी आँखों में अश्रुधारा बह रही थी। तभी अचानक मौसम बदला,बिजली कड़की और असंख्य नीली,हरी, रोशनियां जमीन की तरफ बढ़ने लगी।
एकाएक सभी मित्रो के आसपास रौशनी का घेरा खिंच गया।
उनका सुरक्षा घेरा।
खेल तो अब शुरू हुआ था।
तभी आवाज़ फिर से आई जाओ यहाँ से।
गुरु आज्ञा पालन करते हुए सब वापिस जाने लगे।
वो सड़क की तरफ बढ़ते जा रहे थे की अचानक से।
बाबाजी के पिछवाड़े पे लात पड़ी।
वो गिर गए और जौसे ही उठ के उन्होंने देखा तो कानो में आवाज़ आई उनकी बीवी की
जो बैड पर खड़े होकर चिला रही थी।
कितनी बार कहा है की रात को भुत प्रेतो की कहानिया मत पढा करो लेकिन मेरी सुनता कौन है। एक घंटे से चिला रहे हो
सांप,नाग गुरुजी,बचाओ।कहा है नाग?
बच्चे तो डर गए साथ में पूरा मोहला इकठा हो गया।
ये 22 लात है आपके पिछवाड़े पे तब जाकर सपने से बाहर निकले हो।
जैसे ही बाबाजी ने पिछवाड़े को हाथ लगाया,उनके दिल से कराह सी उठी।
इस प्रकार उनकी सूजी और ऐसी सूजी की आज तक सूजी है।

समाप्त।।।

खूनी घाटी part 2

दूसरी तरफ का नज़ारा देख कर सब हैरान रह गए। चारो तरफ एक खामोशी सी छाई हुई थी। पेड़ थे,हरियाली थी ,पशु पक्षी भी थे लेकिन जैसे सबने मौन धारण कर र...