नागरनाथ को मालूम था की हम इस काल मे जरूर आएंगे इसीलिए उसने इसको माया के प्रभाव से निष्क्रिय कर दिया है। इसका मतलब क्या है प्रेम ने हकलाते हुए पूछा। स्पष्ट शब्दों में अगर बोलू तो जीवित मृत संसार। यहाँ चारो तरफ जीवन है लेकिन माया के प्रभाव में आकर मृतप्राय है। मुम्बा ने जवाब दिया।
चंद्रा भाई में क्या कहता हूं यह से भाग चलो वार्ना हम भी जिंदा भूत बन जाएंगे,मनी बोला। यहाँ से भागना तो दूर अगर कोई मुझसे भी दूर हुआ तो जिंदा लाश बन जायेगा। आप सब मेरे साथ सुरक्षा चक्र में है तो जीवित है वार्ना यह तो आप सांस भी नही ले पाओगे। मुम्बा ने कहा। मुम्बा की यह बात सुनकर सारि प्रेत मंडली की जान हलक में अटक गई। मतलब इधर गए तो मरे ओर उधर गए तो मरे, योगी बोला। जब मरना ही है तो फिर मुम्बा के साथ रहकर मरेंगे ओर सभी ने योगी की बात पर हामी भरी।
अचानक से मुम्बा ने सबको इशारा किया जल्दी चलने का ओर मुम्बा सबको लेकर एक कंदरा में चला गया। कंदरा के अंदर का नज़ारा मदहोश कर देने वाला था।सफेद रोशनी, एक तरफ पानी की छोटी सी धारा बहती हुई। वो सब थोड़ा आगे बढ़े थे कि एक विशालकाय सा प्रेत प्रकट हुआ। जिसका सर नही था लेकिन फिर भी वो अपनी कमर पे हाथ रखे था जैसे सबको देख रहा हो। उसको देखते ही मनी बेहोश हो गया। पायल तो जैसे मरणासन अवस्था मे पहुंच गई। अचानक एक गरज के साथ स्वर गूंजे, किसकी हिम्मत हुई यहां पैर रखने की ओर अचानक,,,