कविता क्रम

                                                       

     मेरी आवाज



माँ मेरी आवाज़ सुनो
मै हु तुम्हारी नन्ही परी
तुम्हारी कोख मे पली
इंतज़ार है मुझे माँ तेरे आँचल
में समाने का
वो तेरा प्यार से मुझे गले लगाने का
माँ वो कब तू मुझे अपने आँचल में समाये
लोरी गाकर सुनाये
माँ वो तेरा प्यार,पापा का दुलार
माँ इंतज़ार है मुझे तेरी कोख से निकल
इस दुनिया में आने का
करके बंद अपनी आँखे तुझमे समाने का
माँ मेरी आवाज़ सुनो।
माँ मुझमे है अपने पापा की झलक
मै परछाई हु तुम्हारी
मुझे यु इस तरह मत भुला माँ
जीना है मुझे ,
मत मार, मुझे बचा माँ
मुझे बचा माँ
आने दे मुझे इस दुनिया में
पाने दे तेरा प्यार
इस तरह मुझसे मुँह मोड़ कर
मुझसे मत कर इंकार
माँ मेरी आवाज सुनो ,मै हु तुम्हारी नन्ही परी
अपने खून से सींचा है तुमने मुझे
हिस्सा हु मै तुम दोनों का
मत फैकना मुझे किसी कूड़े के ढेर पर
नोच डालेंगे अवारा कुते मुझे
मत बहा देना किसी गटर में
जहाँ खा जायेंगे कीड़े मुझे
माँ मेरी आवाज़ सुनो। ……….
मुझे चाहिए तुम्हारा प्यार ,अपनों का दुलार
कब से है मुझे इस दिन का इंतज़ार
मुझे बचा माँ। ………।
इस दुनिया में ला माँ
तेरा हिस्सा हु माँ ,मुझे यु न ठुकरा
मुझे यु न भुला
मुझे मत मार,मुझे बचा माँ
मुझे बचा माँ 
…………..मुझे बचा माँ


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तेरी आँखे



तेरी आँखे  
मुझको बडा तड़फ़ाये 
दिन रात मुझे सताये
तेरी आँखे
सुन्दर झील सी नील गगन सी 
बहती हवा में खुशबु सा मजा दे जाये 
तेरी आँखे 
लाखो सितारों में चमकते चाँद सी 
अँधेरे में रास्ता दिखाए 
तेरी ऑंखें 
जब मिले तेरी नज़र से नज़र 
अजीब सी हलचल जगा जाये
तेरी ऑंखें 
जब भी देखे तू हंस के मेरी तरफ 
सीने में आग लगा जाये 
तेरी आँखे 


  

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