खूनी घाटी (एक डरावना सफर )
ये सर्दियो की अलसाई सी सुबह थी वक़्त होगा कोई 9 बजे के लगभग लेकिन सूर्य महाराज थे की आने का नाम ही नही ले रहे थे। कोहरा अभी भी डटा हुआ था। कमरे में काफी गर्माहट थी मनी दुनिया से बेखबर हो लंबी तान के सो रहा था, तभी फ़ोन की घंटी से उसकी निद्रा भंग हुई। उसने आलस्य में बिस्तर से हाथ बाहर निकाला और टेबल पर फ़ोन की और बड़ा दिया। फ़ोन कान पे लगते ही उधर से आवाज़ आई अभी तक सो रहा है नवाब अबे टाइम तो देख ले 10 बजने वाले है जल्दी से आ तेरा इंतज़ार कर रहा हु और फ़ोन कट गया। दूसरी तरफ यहाँ चहल पहल थी लड़के लडकिया सब क्लास की तरफ भागे जा रहे थे उनमे से एक था एंडी अच्छे व्यक्तिवत का मालिक उसे किसी ने आवाज़ दी आवाज़ देने वाले को देखते ही एंडी की आँखों में चमक आ गयी ये थी पायल खुले बाल कमर तक ऊपर से नीले रंग का कुर्ता और सफ़ेद सलवार में क़यामत लग रही थी।अब ऊपर वाले ने बनाया भी तो फुरसत में था। हेल्लो हेल्लो कहा खो गया एंडी, पायल उसके चेहरे के आगे हाथ हिलाते हुए बोली नही वो उह मम कही नही बताओ क्यों बुलाया एंडी बात को पलटते हुए बोला। क्यों कोई काम होगा तभी बुलाऊँगी वैसे बात नही कर सकती पायल बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली। नही नही ऐसा तो नही कहा मैंने एंडी हकलाते हुए बोला। एंडी आगे कुछ बोलने ही वाला था की उसकी पीठ पर दिया किसी ने जोर से धप्पा दिया एंडी हड़बड़ा उठा जैसे ही पलटा तो सैंडी खड़ा था पीछे क्या हाल है सैंडी बोला ? मैं तो ठीक हु लकिन अगर तू ऐसे ही मारता रहेगा तो किसी दिन जरूर बेहाल हो जाऊंगा एंडी बोला तिलमिलाता हुआ।
इससे पहले की बात और आगे बढ़ती भूख लग रही है कैंटीन जाकर लड़ लेना, पायल लगभग चिलाते हुऐ बोली।दोनों शांत एकदम और चुपचाप पायल के पीछे चल दिए, पायल इठलाती हुई उनके आगे आगे चली जा रही थी वही दूसरी तरफ मनी घर से निकला अपनी गाड़ी में दमकता हुआ चेहरा अच्छी कद काठी चुम्बकीय व्यक्तितत्व और हो भी क्यों न राज्यस्थान के राजवश का वारिस जो है। मनी की गाड़ी सरपट दौड़ती हुई सड़क पर जा रही थी। मनी ने तभी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और सिगरेट सुलगाई अभी दो कश ही खींचे थे की फ़ोन घनघना उठा मनी ने नंबर देखा और फ़ोन काट दिया।उधर एक पाश कालोनी मे घर के नीचे खड़ी गाड़ी में से एक शख्स बाहर निकला योगी नाम सिर्फ योगी था काम योगियो वाला कोई नही था। टीना जल्दी आओ वर्ना मैं चला जाऊंगा योगी चिलाते हुए बोला टीना हड़बड़ी में घर से बाहर आई और आते ही चिल्ला पड़ी सब्र नही होता तुमसे कितनी बार कहा है ऐसे मत चिलाया करो जोर जोर से, फ़ोन भी तो कर सकते हो अक्ल क्या घास चरने चली गई। योगी ने टीना की बातो पे ध्यान दिए बिना गाड़ी स्टार्ट की और गाड़ी भाग चली कॉलेज की तरफ। ये शहर का जाना माना कॉलेज था।
उधर कॉलेज के गेट पर प्रेम सरपट भागा हुआ जा रहा था की तभी अचानक से उसे रुकना पड़ा सामने हरयाणवी छोरा चेतन जो खड़ा था। फस गए ये कमीना कहा से आ गया प्रेम मुह में ही बड़बड़ाते हुए बोला। अरे कित भागा जा रहा है छोरे कहि आग लॉग रही है के चेतन बोला, नही भाई वो क्लास मिस हो जायेगी अरे कोण सी क्लास वो शर्मा जी वाली चिंता न करे छोटू मैं अपने आप देख ल्यूंगा चल कैंटीन चलेंगे भाई। तुम जाओ वो मैं, प्रेम ने विरोध किया लेकिन चेतन ने उसके गले में हाथ डाला और लगभग खीचते हुए कैंटीन की और ले चला। कैंटीन में पायल एंडी सैंडी सब चाय समोसे पर टूटे पड़े थे,तभी चेतन प्रेम को खींचता हुआ लाया और उनके साथ बैठ गया। बैठ छोटू चेतन प्रेम से बोला, छोटू शब्द सुनते ही पायल चिला पड़ी ख़बरदार अगर प्रेम को छोटू बोला तो दुबारा कभी चेतन की तरफ ऊँगली करते हुए बोली, ना तेरा नाम क्या रखु हरयाणवी सांड सारा दिन सांड की तरह घूमता रहेगा और जब देखो प्रेम को परेशान करता रहेगा। अरे अब चुप होजा काहे काली माता सा रूप दिखा रही है,ना कहने का दुबारा सच्ची मुझे मेरे जान से प्यारे सर के बालो की कसम, चेतन के इतना बोलते है सब हंस पड़े, तो कैंटीन में पायल, एंडी, सैंडी, चेतन और प्रेम सभी के ठहाके गुंज रहे थे तभी मनी योगी सोनी और टीना कैंटीन में आये,मनी को देखते ही पायल ने मुँह बिचकाया। महफ़िल चाय और समोसे के साथ रंगीन होने लगी
तो ये थी प्रेत मण्डली लेकिन अधूरी क्योकि कुछ ऐसे भी प्रेत थे जो पढ़ाई को लेकर ज्यादा ही सीरीयस थे तो ये प्रेत मण्डली कैंटीन में उत्पात मचाने के बाद कॉलज के लान में हरी हरी दुब पर जाकर बैठ गयी। तभी हमारे सीरियस प्रेत कुमार, दीपक, संजय और अनुभव का आगमन हुआ इनको देखते ही पायल बोली आओ आओ पढ़ाई के देवताओ आपका स्वागत है। ये प्रेत मण्डली साइंस की स्टूडेंट थी जिसका प्रमाण है वो सटीक जिसका कोई प्रणाम नही वो गलत लेकिन अनुभव और कुमार साइंस से ज्यादा कुछ और वाक्यो में यकीन करते थे । टीना कुछ बोलने ही वाली थी की उन सबको घंटी की आवाज़ सुनाई दी ये टाइम था प्रोफ़ेसर शुभम की क्लास का,और वो मिस करना मतलब आफत को बुलाना।
सभी दौड़ पड़े क्लास की और प्रोफेस्सर शुभम साइंस के साथ साथ दर्शन और धर्म के बारे में भी ज्ञान देते थे। उनका मानना था की विकास और ज्ञान कभी न ख़त्म होने वाली लहर है दर्शन और विज्ञानं एक ही सिक्के के दो पहलु है। प्रेत मण्डली को विज्ञानं के इलावा सारी बाते बेबुनियाद लगती थी। जैसे तैसे प्रेत मण्डली ने वक़्त काटा और क्लास ख़त्म होते ही ऐसे भागे जैसे कसाई के हाथ से बकरा। कैंटीन में आते ही मनी बोला यार कितना पकाते है शुभम सर कभी आत्मा कभी अदृश्य जगत ये साइंस की क्लास लेते है या जादू टोना दिखाते है। मनी की इस बात पर सब खिलखिला पड़े तभी टीना ने बोला मनु कॉलेज में 10 दिन की छुट्टी है क्या प्लान है। इससे पहले की मनु यानि मनी कोई जवाब दे पाता पायल बोल पड़ी क्यों ना हम सब कही घूमने चले, पायल की इस बात पे सभी चहक उठे लकिन भाई जायेंगे कित, चेतन बोला। हा यार जायेंगे कहा। योगी बोला। सभी सोच में पड़ गए तभी एकाएक अनुभव बोल पडा क्यों न हम सब खुनी घाटी चले मनोरंजन का मनोरंजन ओर ज्ञान का ज्ञान।
खुनी घाटी का नाम सुनते ही कुमार ने मना किया लेकिन बाकी सब तैयार हो गए, कुमार को भी मन मारकर तैयार होना पड़ा। जाने का सारा इंतज़ाम मैं कर दूंगा मनी बोला। खाने का मैं पायल ने कहा, और पीने का इंतज़ाम मैं योगी बोला, तो तय हो गया अब टीना चहकते हुए बोली। सोमवार के दिन सभी सुबह मिनी बस में खुनी घाटी की और निकल पड़े। खुनी घाटी लगभग 800 किलोमीटर दूर थी और तो और इसका पता अभी चला था। भूकंप की वजह से धरती में हुई उथल पुथल के कारण जंगल के 5 किलोमीटर के दायरे में कुछ खंडहर ऊपर आ गए। कुछ पुरानी इमारते जैसे अपना वजूद बनाये रखने के लिये जदोहद करती हुई। ये एरिया इतना भयानक था की आस पास के जंगली लोग वहाँ से पलायन कर गए जो भी वहाँ गया उसे कुछ अलग ही एहसास हुआ कुछ तो पागल हो गए कुछ अपने से बेखबर ओर सुनने में आया कई लोग तो वापिस ही नही आये।कोई परिंदा यहाँ तक की जानवर भी वहा नही था तभी तो इसे खुनी घाटी कहा जाता था। लकिन हमारी प्रेत मण्डली जवान बिगड़े हुए शहजादों की थी सब के सब रईस खानदान से तालुक रख्ते थे एक दो को छोड़कर किसी को भूत प्रेत आलोकिक शक्तियों या फिर अपने इलावा किसी और सत्ता का होना दकियानूसी बाते लगती थी।
इनके लिए क्या खुनी घाटी और क्या डर सब मस्ती में मस्त थे कुमार और अनुभव को छोड़कर बाकि सब बियर पर टूटे हुए थे। पायल और टीना आपस में गुफतगू कर रही थी की अचानक से ड्राईवर ने बड़ी जोर से ब्रेक मारे, सब का नशा हवा हो गया। टीना और पायल आगे बैठी थी उन्होंने खुद को संभाला और बाहर देखा, बाहर का नज़ारा देखते ही उनके होश उड़ गए दोनों अपने होशो हवास पे काबू न रख पायी। सभी बदहवास थे की अचानक से एक बच्चे की हंसी गूंजी, पल भर के लिए सभी सिहर उठे लकिन, तभी चेतन चीखा ओये चंद्रा दीपक तेरे को यही रिंगटोन मिली लगाने को सबकी हिला दी कुछ शब्द मुँह में चबाते हुए बोला चेतन। सभी ने दीपक को तीखी नज़रो से देखा , तभी मनी ने बाहर की तरफ देखा और मिमियाती आवाज़ में बोल बाहररर। सबने बाहर की तरफ देखा तो पूरी सड़क पर जैसे खून की नदिया बह रही हो, निकलो यहाँ से जल्दी योगी चिलाया, तभी ड्राईवर ने गाड़ी स्टार्ट करी और सरपट सड़क पर दौड़ा दी। रे हरियाणवी निकाल जरा तीन चार बियर मनी ने आवाज़ लगाई। चेतन जो की अभी अवचेतन में था उसकी तन्द्रा भंग हुई। उसने झटपट बियर निकाली और सबको दी, तो प्रेत मण्डली ने भोग लेना शुरू कर दिया। तभी टीना एकदम से उठी टीना को होश में देखकर सबके चेहरे खिल उठे। योगी ने टीना को पानी पिलाया और हाल चाल पूछा। टीना थोड़ी सहमी हुई थी लकिन ठीक थी उधर पायल को भी होश आया गया था। दोनो को सही देख प्रेत मण्डली अपने रंग में आने लगी।
"सबके चेहरे पे ये जो हंसी है दिले सुकून में है मेरा मेरी जान जो तुम सब में बसी है" कुमार की शायरी सुन कर सब वाह वाह कर उठे "हम परवाने है मोहबत के जल जायेगे इश्क़ ए दरिया में तेरी उल्फत की कसम पर उफ़ न करेंगे एक बार भी हम " चंद्रा के शेयर पर पूरी बस तालियों की आवाज़ से गूँज उठी ।अरे जा खून के दरिया को देख कर तो आवाज़ ना निकली अब आग के दरिया में कूदेगा सोनी बोला। ये सुनकर सब खिलखिला के हंस पडे मौसम अब रंगीन हो चला था। मनी ने सिगरेट सुलगाई और धुंए को कैद से आज़ाद किया ।
प्रेत मण्डली को चले हुए लगभग पांच घंटे हो गए थे । बस सरपट दौड़ रही थी। मुझे भुख लगी है पायल बोली, यार भुख तो मुझ को भी लगी है टीना ने कहा। ड्राईवर कोई होटल दिखे तो रोक लेना सैंडी ने ड्राईवर से कहा, जी साहब ड्राईवर ने जवाब दिया। सब मस्त हो रहे थे मनीष योगी चेतन चंद्रा लेटे हुए थे शायद बियर का असर था। और सोनी तो बैठा बैठा ही एक तरफ लुढ़का पड़ा था। संजय कुमार अनुभव और प्रेम कुछ पढ़ रहे थे । पायल और टीना आँखें बंद करके बैठी हुई थी । एंडी और सैंडी हैडफ़ोन पे गाने सुन रहें थे । सब मगन हो रहे थे की अचानक बस वाले ने ब्रेक लगाये सड़क के किनारे एक होटल था । बस रुकते ही सब भाग लिए कोई फ्रेश होने जा रहा था तो कोई खाने का आर्डर देने। ये एक देहाती ढाबा था कुर्सिया कम और चारपाई ज्यादा थी। सबने खाने का ऑर्डर दिया और जिसको जहा जगह मिली वही लमलेट हो गया सब खाने से फारिग हुए मनी ने बिल चुकता किया और सब बस की तरफ चल पढ़े । मनी बस में चढ़ने ही वाला था उसके कानो में एक जानी पहचानी आवाज़ आई, "मनी भाई" मनी ने पीछे मुड़कर देखा तो ये रजत था। अरे भाई तू यहाँ कैसे रजत से मनी ने पूछा।भाई यहाँ पीछे गांव है मेरा तो घूमता फिरता यहाँ आ जाता हु वैसे आप सब कहा जा रहे हो, रजत सबकी और देखते हुए बोला।अरे यार बस घूमने का प्लान बना और सब चल दिये खुनी घाटी। खुनी घाटी का नाम सुनते ही रजत के चेहरे पर परेशानी उभर गयी, क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो गया ? मनीष बोला,
कुछ् नही भाई लेकिन आप वहा मत जाओ जाने का रास्ता है लकिन आने का नही मैं सब जनता हु वहा कुछ है अजीब। वहाँ जो भी गया लोट कर नही आया। अबे चल ऐसा भी कही होता है मनी रजत को आंख दिखाता हुआ बोला। ठीक है भाई मत मानो लकिन एक प्राथना है आप सुबह निकलना फिर अभी जाओगे तो रात हो जायेगी। आप सब मेरे गांव चलो थोड़ी दुरी पर है सुबह वहा से निकल लेना। रजत की बात सही है, मनी,सोनी बोला और योगी एंडी सैंडी प्रेम और पायल ने भी स्वीकृति में सर हिलाया,मनी ने तत्काल फैसला किया और बोला शाम हो चुकी है खुनी घाटी पहुचते रात हो जायेगी वहाँ न कोई होटल है न गांव है आज रात हम रजत के गांव में रुकते और कल सुबह पूरी तयारी के साथ चलेंगे।
सबकी पहले ही हा थी तो बस चल पड़ी रजत की बाइक के पीछे, रास्ता उबड़ खाबड़ था। बस ऐसे उछल रही थी जैसे पहियो में स्प्रिंग लगे हो,जैसे तैसे करके वो रजत के गांव पहुच गए। बिजली ना के बराबर थी।देहाती इलाका था। अन्धकार अपने पांव फैला चूका था। खाना सब खा चुके थे और थक गए थे। सबके सोने का इंतज़ाम रजत ने आँगन में किया और टीना और पायल कमरे में,अब तो सब से सुबह ही मुलाकात होनी थी तो सब लंबी तानकर सो गए। सुबह मनी की आँख सैंडी की चीख से खुली मनी ने नज़र घुमाई तो देखा सैंडी एक कोने में बैठा थर थर काँप रहा था। वहा का नज़ारा देख सबकी बोलती बंद हो गयी लगभग 6 फुट लंबा सांप सैंडी के बिस्तर पर था,तभी शोरगुल सुन रजत भगा भगा आया उसके साथ पागल सा दिखने वाला एक और लड़का था। सबकी हालात देख जहा रजत मुस्कुरा उठा वही वो पागल भाग के गया और उसने सांप को उठा लिया सब हैरान थे। कोई कुछ कहता इससे पहले रजत बोल उठा ये है चूसी बावरा ये सांप इसी का है। मतलब पालतू, "एंडी बोला" हा भाई रजत ने जवाब दिया ये तो सच में बावरा है अरे पालना है तो तोता,चिड़िया पालो ये सांप क्यों ,मनी बिफरते हुए बोला । अरे भाई जाने दो आधा खाली है रजत बोला।आधा नही पूरा ही ख़ाली है कुमार ने जवाब दिया। इससे पहले कोई और बोलता रजत बोला आप सब फ्रेश हो जाओ मैं नाश्ते का इंतज़ाम करता हु, सभी अपनी नित्य दिनचर्या में लग गए सभी प्रेत लोटा लेकर जंगल की तरफ निकल गए थोड़ी देर बाद सब वापिस आ गए लकिन सैंडी (बाबाजी) नही आये सबको चिंता हुई तो एंडी उनको देखने चल दिया।
जैसे ही एंडी वहा पंहुचा तो देखा बाबाजी बड़े परेशान थे। क्या हुआ सैंडी बाबा? एंडी ने पूछा, सैंडी बाबा कुछ बोले नही बस लोटा उल्टा करकर दिखा दिया वो देख एंडी लोटपोट होने लगा। बुड़बक यहाँ सब अटका पड़ा है तुझे हंसी आ रही है, सैंडी यार लौटे में तो छेद है एंडी बोला। हा तभी तो अटका पड़ा हु,जा जाकर दूसरा लोटा ला पानी भरकर,भाई सिर्फ मैं जानता हु कैसे रुका हुआ हूं जल्दी कर सैंडी बोला। इतना सुनकर एंडी वापिस हो लिया। उधर गांव में अचानक से एक शोर गूंजा सभी उस और भागने लगे जहा से आवाज़ आयी थी। यहाँ तो प्रेत मण्डली की बस खड़ी थी ।बस का टायर फट गया था अपने आप हैरानी की बात थी। बस रात से वही खड़ी थी ड्राईवर मुह लटका के खड़ा था। अब क्या करेगे प्रेम बोला? टायर बदलना पड़ेगा चंद्रा ने जवाब दिया, ड्राईवर साहब कितना टाइम लगेगा मनी सिगरेट के कश उडाता हुआ बोला, साहब यही कोई 40 से 45 मिनेट ह्म्म्म्म चलो, सब नाश्ते पानी से फारिग हो लो मनीष बोला, सब वापिस हो लिए रजत ने नाश्ते का बेहतरीन इंतज़ाम किया था आलू प्याज़ और गोबी के परांठे साथ में लस्सी धनिया और पुदीने की चटनी, खाने की महक से ही सबके मुह में पानी आ गया। ऊपर से गांव का माहोल खुला आसमान, हरयाली, सबसे बड़ी बात देसी तरीके से बना हुआ खाना तो जी सबने भरपेट खाया खाना साथ के लिए रजत ने खाना बंधवा दिया था। सफर अभी काम से काम 4 घंटो का था। अरे रजत ये क्या रखवा रहे हो गाड़ी की डिकी में, सोनी दांत कुरेदते हुए बोला। भाई जहा जा रहे हो वह कोई होटल नहीं मिलेगा ये कुछ दाल सब्जी मसाले और आटा है साथ में तिरपाल भी है तम्बू बनाने के लिए, क्या पता हालात कैसे हो। वाह वाह भाई अनुभव रजत की पीठ ठोकते हुए बोला। भाई वाकई बड़े समझदार आदमी हो तुम कुमार कान खुजाते हुए बोला , सब सुनो मनी बोला, हांजी सुनाओ पायल खिलखिलाते हुए बोली, मनी ने पायल की आँखों में देखा और होले से मुस्कराया। ये देख कर टीना बोली फ़रमाओ मनु ये नैन मटका बाद में कर लेना भागी नही जा रही पायल कही, मनी टीना की बात पर थोडा झेप गया हा तो मैं कह रहा था की रजत हमारे साथ चलेगा सब जल्दी से अपना सामान समेटो रजत के साथ चलने की बात सुन कर सभी खुश हो गए सबने रजत के माता पिता के पाव छुए और इज़ाज़त ली, सब बस की तरफ चल पड़े अब तक बस का टायर बदल दिया था। ड्राईवर बीड़ी फुकत्ता सबका इंतज़ार कर रहा था।
बस एक बार फिर अपनी रफ्तार से आगे बढ़ चली खूनी घाटी की तरफ कुछ घंटों के सफर के बाद बस जंगल की ओर मुड़ चली रास्ता उबड़ खाबड़ था जैसे किसी ने पत्थर बिछा दिए हो, बस अभी थोड़ा दूर ही गयी थी कि ड्राइवर को अचानक ब्रेक लगानी पड़ी, क्या हुआ भाई ? प्रेम बोला ,कुछ नही साहब आगे रास्ता बंद है।ड्राइवर की बात सुनकर सब नीचे उतरे तो देखा आगे कंटीली तार बंदी हुई थी और बोर्ड लगा था कृपया इससे आगे न जाये खतरा है, चेतन भाग कर बस में गया और पलास उठा लाया उसने वो कंटीली तार काट दी, अब चले रे आगे ने चेतन बोला।
सब भाग कर बस में चढ़ गए बस फिर से आगे बढ़ गयी जैसे जैसे बस आगे बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे मौसम में बदलाव आता जा रहा था। ठंडक बढ़ती जा रही थी जैसे, जंगल का माहौल बेहद ही डरावना था। जानवरो की आवाज़ों की जगह यहां शांति पसरी थी ।यार यहाँ इतनी शांति क्यो है टीना बोली,
क्रमश:
ये सर्दियो की अलसाई सी सुबह थी वक़्त होगा कोई 9 बजे के लगभग लेकिन सूर्य महाराज थे की आने का नाम ही नही ले रहे थे। कोहरा अभी भी डटा हुआ था। कमरे में काफी गर्माहट थी मनी दुनिया से बेखबर हो लंबी तान के सो रहा था, तभी फ़ोन की घंटी से उसकी निद्रा भंग हुई। उसने आलस्य में बिस्तर से हाथ बाहर निकाला और टेबल पर फ़ोन की और बड़ा दिया। फ़ोन कान पे लगते ही उधर से आवाज़ आई अभी तक सो रहा है नवाब अबे टाइम तो देख ले 10 बजने वाले है जल्दी से आ तेरा इंतज़ार कर रहा हु और फ़ोन कट गया। दूसरी तरफ यहाँ चहल पहल थी लड़के लडकिया सब क्लास की तरफ भागे जा रहे थे उनमे से एक था एंडी अच्छे व्यक्तिवत का मालिक उसे किसी ने आवाज़ दी आवाज़ देने वाले को देखते ही एंडी की आँखों में चमक आ गयी ये थी पायल खुले बाल कमर तक ऊपर से नीले रंग का कुर्ता और सफ़ेद सलवार में क़यामत लग रही थी।अब ऊपर वाले ने बनाया भी तो फुरसत में था। हेल्लो हेल्लो कहा खो गया एंडी, पायल उसके चेहरे के आगे हाथ हिलाते हुए बोली नही वो उह मम कही नही बताओ क्यों बुलाया एंडी बात को पलटते हुए बोला। क्यों कोई काम होगा तभी बुलाऊँगी वैसे बात नही कर सकती पायल बनावटी गुस्सा दिखाते हुए बोली। नही नही ऐसा तो नही कहा मैंने एंडी हकलाते हुए बोला। एंडी आगे कुछ बोलने ही वाला था की उसकी पीठ पर दिया किसी ने जोर से धप्पा दिया एंडी हड़बड़ा उठा जैसे ही पलटा तो सैंडी खड़ा था पीछे क्या हाल है सैंडी बोला ? मैं तो ठीक हु लकिन अगर तू ऐसे ही मारता रहेगा तो किसी दिन जरूर बेहाल हो जाऊंगा एंडी बोला तिलमिलाता हुआ।
इससे पहले की बात और आगे बढ़ती भूख लग रही है कैंटीन जाकर लड़ लेना, पायल लगभग चिलाते हुऐ बोली।दोनों शांत एकदम और चुपचाप पायल के पीछे चल दिए, पायल इठलाती हुई उनके आगे आगे चली जा रही थी वही दूसरी तरफ मनी घर से निकला अपनी गाड़ी में दमकता हुआ चेहरा अच्छी कद काठी चुम्बकीय व्यक्तितत्व और हो भी क्यों न राज्यस्थान के राजवश का वारिस जो है। मनी की गाड़ी सरपट दौड़ती हुई सड़क पर जा रही थी। मनी ने तभी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और सिगरेट सुलगाई अभी दो कश ही खींचे थे की फ़ोन घनघना उठा मनी ने नंबर देखा और फ़ोन काट दिया।उधर एक पाश कालोनी मे घर के नीचे खड़ी गाड़ी में से एक शख्स बाहर निकला योगी नाम सिर्फ योगी था काम योगियो वाला कोई नही था। टीना जल्दी आओ वर्ना मैं चला जाऊंगा योगी चिलाते हुए बोला टीना हड़बड़ी में घर से बाहर आई और आते ही चिल्ला पड़ी सब्र नही होता तुमसे कितनी बार कहा है ऐसे मत चिलाया करो जोर जोर से, फ़ोन भी तो कर सकते हो अक्ल क्या घास चरने चली गई। योगी ने टीना की बातो पे ध्यान दिए बिना गाड़ी स्टार्ट की और गाड़ी भाग चली कॉलेज की तरफ। ये शहर का जाना माना कॉलेज था।
उधर कॉलेज के गेट पर प्रेम सरपट भागा हुआ जा रहा था की तभी अचानक से उसे रुकना पड़ा सामने हरयाणवी छोरा चेतन जो खड़ा था। फस गए ये कमीना कहा से आ गया प्रेम मुह में ही बड़बड़ाते हुए बोला। अरे कित भागा जा रहा है छोरे कहि आग लॉग रही है के चेतन बोला, नही भाई वो क्लास मिस हो जायेगी अरे कोण सी क्लास वो शर्मा जी वाली चिंता न करे छोटू मैं अपने आप देख ल्यूंगा चल कैंटीन चलेंगे भाई। तुम जाओ वो मैं, प्रेम ने विरोध किया लेकिन चेतन ने उसके गले में हाथ डाला और लगभग खीचते हुए कैंटीन की और ले चला। कैंटीन में पायल एंडी सैंडी सब चाय समोसे पर टूटे पड़े थे,तभी चेतन प्रेम को खींचता हुआ लाया और उनके साथ बैठ गया। बैठ छोटू चेतन प्रेम से बोला, छोटू शब्द सुनते ही पायल चिला पड़ी ख़बरदार अगर प्रेम को छोटू बोला तो दुबारा कभी चेतन की तरफ ऊँगली करते हुए बोली, ना तेरा नाम क्या रखु हरयाणवी सांड सारा दिन सांड की तरह घूमता रहेगा और जब देखो प्रेम को परेशान करता रहेगा। अरे अब चुप होजा काहे काली माता सा रूप दिखा रही है,ना कहने का दुबारा सच्ची मुझे मेरे जान से प्यारे सर के बालो की कसम, चेतन के इतना बोलते है सब हंस पड़े, तो कैंटीन में पायल, एंडी, सैंडी, चेतन और प्रेम सभी के ठहाके गुंज रहे थे तभी मनी योगी सोनी और टीना कैंटीन में आये,मनी को देखते ही पायल ने मुँह बिचकाया। महफ़िल चाय और समोसे के साथ रंगीन होने लगी
तो ये थी प्रेत मण्डली लेकिन अधूरी क्योकि कुछ ऐसे भी प्रेत थे जो पढ़ाई को लेकर ज्यादा ही सीरीयस थे तो ये प्रेत मण्डली कैंटीन में उत्पात मचाने के बाद कॉलज के लान में हरी हरी दुब पर जाकर बैठ गयी। तभी हमारे सीरियस प्रेत कुमार, दीपक, संजय और अनुभव का आगमन हुआ इनको देखते ही पायल बोली आओ आओ पढ़ाई के देवताओ आपका स्वागत है। ये प्रेत मण्डली साइंस की स्टूडेंट थी जिसका प्रमाण है वो सटीक जिसका कोई प्रणाम नही वो गलत लेकिन अनुभव और कुमार साइंस से ज्यादा कुछ और वाक्यो में यकीन करते थे । टीना कुछ बोलने ही वाली थी की उन सबको घंटी की आवाज़ सुनाई दी ये टाइम था प्रोफ़ेसर शुभम की क्लास का,और वो मिस करना मतलब आफत को बुलाना।
सभी दौड़ पड़े क्लास की और प्रोफेस्सर शुभम साइंस के साथ साथ दर्शन और धर्म के बारे में भी ज्ञान देते थे। उनका मानना था की विकास और ज्ञान कभी न ख़त्म होने वाली लहर है दर्शन और विज्ञानं एक ही सिक्के के दो पहलु है। प्रेत मण्डली को विज्ञानं के इलावा सारी बाते बेबुनियाद लगती थी। जैसे तैसे प्रेत मण्डली ने वक़्त काटा और क्लास ख़त्म होते ही ऐसे भागे जैसे कसाई के हाथ से बकरा। कैंटीन में आते ही मनी बोला यार कितना पकाते है शुभम सर कभी आत्मा कभी अदृश्य जगत ये साइंस की क्लास लेते है या जादू टोना दिखाते है। मनी की इस बात पर सब खिलखिला पड़े तभी टीना ने बोला मनु कॉलेज में 10 दिन की छुट्टी है क्या प्लान है। इससे पहले की मनु यानि मनी कोई जवाब दे पाता पायल बोल पड़ी क्यों ना हम सब कही घूमने चले, पायल की इस बात पे सभी चहक उठे लकिन भाई जायेंगे कित, चेतन बोला। हा यार जायेंगे कहा। योगी बोला। सभी सोच में पड़ गए तभी एकाएक अनुभव बोल पडा क्यों न हम सब खुनी घाटी चले मनोरंजन का मनोरंजन ओर ज्ञान का ज्ञान।
खुनी घाटी का नाम सुनते ही कुमार ने मना किया लेकिन बाकी सब तैयार हो गए, कुमार को भी मन मारकर तैयार होना पड़ा। जाने का सारा इंतज़ाम मैं कर दूंगा मनी बोला। खाने का मैं पायल ने कहा, और पीने का इंतज़ाम मैं योगी बोला, तो तय हो गया अब टीना चहकते हुए बोली। सोमवार के दिन सभी सुबह मिनी बस में खुनी घाटी की और निकल पड़े। खुनी घाटी लगभग 800 किलोमीटर दूर थी और तो और इसका पता अभी चला था। भूकंप की वजह से धरती में हुई उथल पुथल के कारण जंगल के 5 किलोमीटर के दायरे में कुछ खंडहर ऊपर आ गए। कुछ पुरानी इमारते जैसे अपना वजूद बनाये रखने के लिये जदोहद करती हुई। ये एरिया इतना भयानक था की आस पास के जंगली लोग वहाँ से पलायन कर गए जो भी वहाँ गया उसे कुछ अलग ही एहसास हुआ कुछ तो पागल हो गए कुछ अपने से बेखबर ओर सुनने में आया कई लोग तो वापिस ही नही आये।कोई परिंदा यहाँ तक की जानवर भी वहा नही था तभी तो इसे खुनी घाटी कहा जाता था। लकिन हमारी प्रेत मण्डली जवान बिगड़े हुए शहजादों की थी सब के सब रईस खानदान से तालुक रख्ते थे एक दो को छोड़कर किसी को भूत प्रेत आलोकिक शक्तियों या फिर अपने इलावा किसी और सत्ता का होना दकियानूसी बाते लगती थी।
इनके लिए क्या खुनी घाटी और क्या डर सब मस्ती में मस्त थे कुमार और अनुभव को छोड़कर बाकि सब बियर पर टूटे हुए थे। पायल और टीना आपस में गुफतगू कर रही थी की अचानक से ड्राईवर ने बड़ी जोर से ब्रेक मारे, सब का नशा हवा हो गया। टीना और पायल आगे बैठी थी उन्होंने खुद को संभाला और बाहर देखा, बाहर का नज़ारा देखते ही उनके होश उड़ गए दोनों अपने होशो हवास पे काबू न रख पायी। सभी बदहवास थे की अचानक से एक बच्चे की हंसी गूंजी, पल भर के लिए सभी सिहर उठे लकिन, तभी चेतन चीखा ओये चंद्रा दीपक तेरे को यही रिंगटोन मिली लगाने को सबकी हिला दी कुछ शब्द मुँह में चबाते हुए बोला चेतन। सभी ने दीपक को तीखी नज़रो से देखा , तभी मनी ने बाहर की तरफ देखा और मिमियाती आवाज़ में बोल बाहररर। सबने बाहर की तरफ देखा तो पूरी सड़क पर जैसे खून की नदिया बह रही हो, निकलो यहाँ से जल्दी योगी चिलाया, तभी ड्राईवर ने गाड़ी स्टार्ट करी और सरपट सड़क पर दौड़ा दी। रे हरियाणवी निकाल जरा तीन चार बियर मनी ने आवाज़ लगाई। चेतन जो की अभी अवचेतन में था उसकी तन्द्रा भंग हुई। उसने झटपट बियर निकाली और सबको दी, तो प्रेत मण्डली ने भोग लेना शुरू कर दिया। तभी टीना एकदम से उठी टीना को होश में देखकर सबके चेहरे खिल उठे। योगी ने टीना को पानी पिलाया और हाल चाल पूछा। टीना थोड़ी सहमी हुई थी लकिन ठीक थी उधर पायल को भी होश आया गया था। दोनो को सही देख प्रेत मण्डली अपने रंग में आने लगी।
"सबके चेहरे पे ये जो हंसी है दिले सुकून में है मेरा मेरी जान जो तुम सब में बसी है" कुमार की शायरी सुन कर सब वाह वाह कर उठे "हम परवाने है मोहबत के जल जायेगे इश्क़ ए दरिया में तेरी उल्फत की कसम पर उफ़ न करेंगे एक बार भी हम " चंद्रा के शेयर पर पूरी बस तालियों की आवाज़ से गूँज उठी ।अरे जा खून के दरिया को देख कर तो आवाज़ ना निकली अब आग के दरिया में कूदेगा सोनी बोला। ये सुनकर सब खिलखिला के हंस पडे मौसम अब रंगीन हो चला था। मनी ने सिगरेट सुलगाई और धुंए को कैद से आज़ाद किया ।
प्रेत मण्डली को चले हुए लगभग पांच घंटे हो गए थे । बस सरपट दौड़ रही थी। मुझे भुख लगी है पायल बोली, यार भुख तो मुझ को भी लगी है टीना ने कहा। ड्राईवर कोई होटल दिखे तो रोक लेना सैंडी ने ड्राईवर से कहा, जी साहब ड्राईवर ने जवाब दिया। सब मस्त हो रहे थे मनीष योगी चेतन चंद्रा लेटे हुए थे शायद बियर का असर था। और सोनी तो बैठा बैठा ही एक तरफ लुढ़का पड़ा था। संजय कुमार अनुभव और प्रेम कुछ पढ़ रहे थे । पायल और टीना आँखें बंद करके बैठी हुई थी । एंडी और सैंडी हैडफ़ोन पे गाने सुन रहें थे । सब मगन हो रहे थे की अचानक बस वाले ने ब्रेक लगाये सड़क के किनारे एक होटल था । बस रुकते ही सब भाग लिए कोई फ्रेश होने जा रहा था तो कोई खाने का आर्डर देने। ये एक देहाती ढाबा था कुर्सिया कम और चारपाई ज्यादा थी। सबने खाने का ऑर्डर दिया और जिसको जहा जगह मिली वही लमलेट हो गया सब खाने से फारिग हुए मनी ने बिल चुकता किया और सब बस की तरफ चल पढ़े । मनी बस में चढ़ने ही वाला था उसके कानो में एक जानी पहचानी आवाज़ आई, "मनी भाई" मनी ने पीछे मुड़कर देखा तो ये रजत था। अरे भाई तू यहाँ कैसे रजत से मनी ने पूछा।भाई यहाँ पीछे गांव है मेरा तो घूमता फिरता यहाँ आ जाता हु वैसे आप सब कहा जा रहे हो, रजत सबकी और देखते हुए बोला।अरे यार बस घूमने का प्लान बना और सब चल दिये खुनी घाटी। खुनी घाटी का नाम सुनते ही रजत के चेहरे पर परेशानी उभर गयी, क्या हुआ इतना परेशान क्यों हो गया ? मनीष बोला,
कुछ् नही भाई लेकिन आप वहा मत जाओ जाने का रास्ता है लकिन आने का नही मैं सब जनता हु वहा कुछ है अजीब। वहाँ जो भी गया लोट कर नही आया। अबे चल ऐसा भी कही होता है मनी रजत को आंख दिखाता हुआ बोला। ठीक है भाई मत मानो लकिन एक प्राथना है आप सुबह निकलना फिर अभी जाओगे तो रात हो जायेगी। आप सब मेरे गांव चलो थोड़ी दुरी पर है सुबह वहा से निकल लेना। रजत की बात सही है, मनी,सोनी बोला और योगी एंडी सैंडी प्रेम और पायल ने भी स्वीकृति में सर हिलाया,मनी ने तत्काल फैसला किया और बोला शाम हो चुकी है खुनी घाटी पहुचते रात हो जायेगी वहाँ न कोई होटल है न गांव है आज रात हम रजत के गांव में रुकते और कल सुबह पूरी तयारी के साथ चलेंगे।
सबकी पहले ही हा थी तो बस चल पड़ी रजत की बाइक के पीछे, रास्ता उबड़ खाबड़ था। बस ऐसे उछल रही थी जैसे पहियो में स्प्रिंग लगे हो,जैसे तैसे करके वो रजत के गांव पहुच गए। बिजली ना के बराबर थी।देहाती इलाका था। अन्धकार अपने पांव फैला चूका था। खाना सब खा चुके थे और थक गए थे। सबके सोने का इंतज़ाम रजत ने आँगन में किया और टीना और पायल कमरे में,अब तो सब से सुबह ही मुलाकात होनी थी तो सब लंबी तानकर सो गए। सुबह मनी की आँख सैंडी की चीख से खुली मनी ने नज़र घुमाई तो देखा सैंडी एक कोने में बैठा थर थर काँप रहा था। वहा का नज़ारा देख सबकी बोलती बंद हो गयी लगभग 6 फुट लंबा सांप सैंडी के बिस्तर पर था,तभी शोरगुल सुन रजत भगा भगा आया उसके साथ पागल सा दिखने वाला एक और लड़का था। सबकी हालात देख जहा रजत मुस्कुरा उठा वही वो पागल भाग के गया और उसने सांप को उठा लिया सब हैरान थे। कोई कुछ कहता इससे पहले रजत बोल उठा ये है चूसी बावरा ये सांप इसी का है। मतलब पालतू, "एंडी बोला" हा भाई रजत ने जवाब दिया ये तो सच में बावरा है अरे पालना है तो तोता,चिड़िया पालो ये सांप क्यों ,मनी बिफरते हुए बोला । अरे भाई जाने दो आधा खाली है रजत बोला।आधा नही पूरा ही ख़ाली है कुमार ने जवाब दिया। इससे पहले कोई और बोलता रजत बोला आप सब फ्रेश हो जाओ मैं नाश्ते का इंतज़ाम करता हु, सभी अपनी नित्य दिनचर्या में लग गए सभी प्रेत लोटा लेकर जंगल की तरफ निकल गए थोड़ी देर बाद सब वापिस आ गए लकिन सैंडी (बाबाजी) नही आये सबको चिंता हुई तो एंडी उनको देखने चल दिया।
जैसे ही एंडी वहा पंहुचा तो देखा बाबाजी बड़े परेशान थे। क्या हुआ सैंडी बाबा? एंडी ने पूछा, सैंडी बाबा कुछ बोले नही बस लोटा उल्टा करकर दिखा दिया वो देख एंडी लोटपोट होने लगा। बुड़बक यहाँ सब अटका पड़ा है तुझे हंसी आ रही है, सैंडी यार लौटे में तो छेद है एंडी बोला। हा तभी तो अटका पड़ा हु,जा जाकर दूसरा लोटा ला पानी भरकर,भाई सिर्फ मैं जानता हु कैसे रुका हुआ हूं जल्दी कर सैंडी बोला। इतना सुनकर एंडी वापिस हो लिया। उधर गांव में अचानक से एक शोर गूंजा सभी उस और भागने लगे जहा से आवाज़ आयी थी। यहाँ तो प्रेत मण्डली की बस खड़ी थी ।बस का टायर फट गया था अपने आप हैरानी की बात थी। बस रात से वही खड़ी थी ड्राईवर मुह लटका के खड़ा था। अब क्या करेगे प्रेम बोला? टायर बदलना पड़ेगा चंद्रा ने जवाब दिया, ड्राईवर साहब कितना टाइम लगेगा मनी सिगरेट के कश उडाता हुआ बोला, साहब यही कोई 40 से 45 मिनेट ह्म्म्म्म चलो, सब नाश्ते पानी से फारिग हो लो मनीष बोला, सब वापिस हो लिए रजत ने नाश्ते का बेहतरीन इंतज़ाम किया था आलू प्याज़ और गोबी के परांठे साथ में लस्सी धनिया और पुदीने की चटनी, खाने की महक से ही सबके मुह में पानी आ गया। ऊपर से गांव का माहोल खुला आसमान, हरयाली, सबसे बड़ी बात देसी तरीके से बना हुआ खाना तो जी सबने भरपेट खाया खाना साथ के लिए रजत ने खाना बंधवा दिया था। सफर अभी काम से काम 4 घंटो का था। अरे रजत ये क्या रखवा रहे हो गाड़ी की डिकी में, सोनी दांत कुरेदते हुए बोला। भाई जहा जा रहे हो वह कोई होटल नहीं मिलेगा ये कुछ दाल सब्जी मसाले और आटा है साथ में तिरपाल भी है तम्बू बनाने के लिए, क्या पता हालात कैसे हो। वाह वाह भाई अनुभव रजत की पीठ ठोकते हुए बोला। भाई वाकई बड़े समझदार आदमी हो तुम कुमार कान खुजाते हुए बोला , सब सुनो मनी बोला, हांजी सुनाओ पायल खिलखिलाते हुए बोली, मनी ने पायल की आँखों में देखा और होले से मुस्कराया। ये देख कर टीना बोली फ़रमाओ मनु ये नैन मटका बाद में कर लेना भागी नही जा रही पायल कही, मनी टीना की बात पर थोडा झेप गया हा तो मैं कह रहा था की रजत हमारे साथ चलेगा सब जल्दी से अपना सामान समेटो रजत के साथ चलने की बात सुन कर सभी खुश हो गए सबने रजत के माता पिता के पाव छुए और इज़ाज़त ली, सब बस की तरफ चल पड़े अब तक बस का टायर बदल दिया था। ड्राईवर बीड़ी फुकत्ता सबका इंतज़ार कर रहा था।
बस एक बार फिर अपनी रफ्तार से आगे बढ़ चली खूनी घाटी की तरफ कुछ घंटों के सफर के बाद बस जंगल की ओर मुड़ चली रास्ता उबड़ खाबड़ था जैसे किसी ने पत्थर बिछा दिए हो, बस अभी थोड़ा दूर ही गयी थी कि ड्राइवर को अचानक ब्रेक लगानी पड़ी, क्या हुआ भाई ? प्रेम बोला ,कुछ नही साहब आगे रास्ता बंद है।ड्राइवर की बात सुनकर सब नीचे उतरे तो देखा आगे कंटीली तार बंदी हुई थी और बोर्ड लगा था कृपया इससे आगे न जाये खतरा है, चेतन भाग कर बस में गया और पलास उठा लाया उसने वो कंटीली तार काट दी, अब चले रे आगे ने चेतन बोला।
सब भाग कर बस में चढ़ गए बस फिर से आगे बढ़ गयी जैसे जैसे बस आगे बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे मौसम में बदलाव आता जा रहा था। ठंडक बढ़ती जा रही थी जैसे, जंगल का माहौल बेहद ही डरावना था। जानवरो की आवाज़ों की जगह यहां शांति पसरी थी ।यार यहाँ इतनी शांति क्यो है टीना बोली,
क्रमश:
अब आगे।
लगता है हम प्रेतों के आने की खबर हो गयी है सबको इसलिए भाग लिए सब इतना कहकर योगी खिलखिला कर हंस पड़ा। उसके साथ बाकी भी ठहाके लगाने लगे, दोस्तो,मनी भाई अब भी कहता हूं वापिस चलो यह कुछ ठीक नही लग रहा रजत बोला, अरे रजत डरता क्यो है यार हो सकता है लोग यहाँ खज़ाना ढूंढने आते हो और नुकसान पहुंचाते हो और जंगली जानवरों का शिकार बन गए हो अब जितने मुँह उतनी बाते जो होगा देख लेंगे। अगर कोई दिकत आती है तो ये है ना फिर मेरे पास, मनी ने जेब से पिस्तौल निकाल कर दिखाते हुए बोला। मनी ये सिर्फ जानवरो या हम पर काम करेगी लेकिन अगर कुछ ऐसा हुआ जो समझ से बाहर का हो तो, कुमार बोला।अरे कुमार ई भूत वुत कुछ न होवे, नू ना डरा करे चेतन बोला, इतने में बस रुक गयी सबने बाहर देखा तो उन्हें खंडहर नज़र आये ऐसा लगता था जैसे वो किसी ओर ही वक़्त में आ गए,सब बस से नीचे उतरे सभी जरूरी सामान उत्तार लो बस से संजय बोला बैग उठा कर बस से उतरता हुआ। सभी यहां आओ अनुभव ने बुलाया सबको, सब आ गए तो अनुभव बोला सब काम बाँट लो ताकि अंधेरा होने से पहले हम लोग खाने पीने और सोने का इंतज़ाम कर ले। क्या करना है पायल बोली?
करना वर्ना कुछ नही पायल और टीना तुम कुछ जगह साफ करो बैठने के लिए, रजत और संजय तुम लोग खाना बनाने का इंतज़ाम करो, मनी और कुमार लकडिया इकठी करो मशाल बनाने और खाना बनाने के लिये, बाकि सब मेरे साथ सामान उतारो।
सब अपने अपने काम में लग गए रजत ने एक जगह देख कर उसे साफ करके वहा पत्थर का चूल्हा बना दिया, अनुभव ने वहा सुखी लकडिया इकठी की और कुमार मशाल बनाने में लगा था। बाकि प्रेतो ने सारा सामान बस से उतार लिया तभी मनीष ने संजय और शांतुनु को आवाज दी भाई आओ कुछ सामान अंदर भी है बस के, तीनो बस के अंदर गए और बाहर निकले तो तीनो के हाथ में बियर और दारू की पेटिया थी। वाह आज जंगल में मंगल हरप्रीत चहकता हुआ बोला, भाई लकिन ये तो गर्म है कैसे पियेंगे। दारू तो चल जायेगी पानी ठंडा है यहाँ पर लेकिन बियर चेतन बोला, ओये हरयाणवी तुझे कितनी बार कहा है की मगज मत मारा कर, दीपक चंद्रा चेतन को देखते हुए बोला।ला भाई शांतुनु इधर दे पेटी , चंद्रा पेटी ले तालाब की और चल पड़ा उसने पेटी को तालाब के किनारे पानी के अंदर कीचड़ में दबा दिया और बोला आधा घंटे बाद मस्त वाली ठंडी मिलेगी। रजत भाई अगर तुम न होते तो आज भूख से तड़फ जाते हम, अनुभव रजत के कंधे पे हाथ रखते हुए बोला, ऐसी बात नही भाई मुझे पता था यहाँ जंगल में कुछ नही मिलेगा इसलिए कच्ची सब्जिया मसाले चावल और आटा रख लिया रजत बोला। अनुभव सही कह रहा है बस को तो मनी ने मिनी बार बना दिया खाने को कुछ नही पिने को बहुत कुछ ये, सब तो पीकर टुन हो जाते मेरा टीना और अनुभव कुमार और प्रेम हम सबका क्या होता पायल बोली।
इससे पहले रजत कुछ कहता, मेरी बुराई हो रही है मनी उस तरफ आता हुआ बोला। अरे भाई आप तो तारीफ के काबिल हो पीने का इतना जुगाड़ मजा आ गया सोनी बोला। सुनो सब मनीष बोला,सभी काम में हाथ लगाओ ताकि खाना जल्दी बन सके सब फिर से काम पे लग गए कोई आलू छील रहा, कोई चावल धो रहा तो कोई बर्तनों में पानी भर रहा सबने मिलजुल कर काम निपटा लिया अब बारी थी मंगल करने की तो शांतुनु और हरप्रीत ने शराब की बोतल निकाल ली सैंडी तालाब से बियर की पेटी निकाल लाया संजय चंद्रा और रजत खाने का सामान ले आये मसालेदार भुने हुए आलू, दाल और सलाद सबने चोकड़ी जमा ली सबने चियर्स किया और अपने अपने जाम को पेट के अन्दर का रास्ता दिखाया। भाई आनद आ गया संजय बोला, सही भाई खुला आसमान चमकते सितारे यहाँ पीने का मजा ही कुछ और है मनी बोला, अब शुरू हो गया था जंगल में मंगल पियक्कड़ प्रेत तो जुट गए थे दो दो हाथ करने मदिरा से बाकि अनुभव प्रेम,कुमार पायल और टीना थोड़ी दुरी पे बैठे भोजन का आनद ले रहे थे।अरे ओ कुमारवा जरा हमरी नब्ज चेक करके बता की हम जिन्दा है या मर गए बुड़बक, सैंडी बोला, सैंडी की बात सुनकर सब खिलखिला पड़े तभी अचानक मनी खड़ा हुआ और बोला किसी ने सुना क्या भाई? शांतुनु बोला कोई गुर्रा रहा है शायद कोई जानवर होगा। कोई गल नई जे आ गया तो साले को फाड़ दूंगा हरप्रीत बोला, भाई बस वो सुनकर ही डरकर भाग गया होगा, "संजय चुटकी लेते हुए बोला" सब हंस पड़े फिर से मदिरा का दौर शुरू हो गया। अचानक से पायल चीखी, मदिरा के मद में सभी झूम रहे थे, सिगरेट के धुंए को हवा में उडा रहे थे। पायल की चीख जंगल के सुनसान वातावरण में गूंजः गयी प्रेत मण्डली के मदिरापान में भी खलल डला, मदिरा के आगोश से निकल कर वो सब पायल की तरफ दौड़ पड़े। क्या हुआ पायल? मनी ने पायल के हाथ को अपने हाथ में लेते हुए पूछा, पायल बदहवास बस एक तरफ देखे जाये कुछ बोले न। सोनी ने अनुभव, प्रेम से पूछा क्या बात हुई, दोनों ने ना में सर हिला दिया। कोई कुछ समझ नही पा रहा था मनी ने पायल को झझ्कोर के पूछा पायल हुआ क्या बताओ,
पायल ने एक तरफ हाथ से इशारा कर दिया वहा तालाब के उस पार पेड़ो के बीच कोई खड़ा था ऐसा प्रतीत हो रहा था। चाँद की हलकी हलकी रौशनी थी तो ज्यादा कुछ दिखाई न पड रहा था। कोण है सामने आ कायर, हरप्रीत चीख कर बोला, सामने आ नही तो वही दफन कर दूंगा। लकिन कोई हरकत नही हुई वहाँ पर सब इसी कशमकश में की वहा जाये के नही तबी प्रेम एक तरफ भागा और उसने मशाल उठा ली और उसे जला दिया मशाल से वहा रौशनी फैल गयी। इससे पहले की वो आगे बढ़ते उस साये की तरफ वो साया वहा से निकल उनकी तरफ भाग लिया सबकी सिटी पिटी गुम, पायल डर के मारे सैंडी से लिपट गयी, टीना ने एंडी को कसके पकड़ लिया और सैंडी पान चबाना भूल उसको निगल गया,चंद्रा चेतन और सोनी एक साथ खड़े थे। अनुभव कुमार और प्रेम भी एक साथ थे। संजय ने हाथ में बड़ी सी लकड़ी ले रखी थी। कोई भागना मत,अगर भागे तो अकेले पड जायेगे जो होगा मिलकर मुकाबला करेगे योगी बोला। शांतुनु को कुछ और नही मिला तो उसने एक बियर की खाली बोतल ही उठा ली। वो साया सीधा प्रेम की तरफ भागा आ रहा था उसका ध्यान सिर्फ प्रेम पर था। उसे अपनी और आते देख प्रेम की हालत ख़राब हो गयी भाग वो सकता नही था जायेगा भी तो कहाँ, प्रेम की टांगे डर के मारे थरथराने लगी " मुझे छोड़ के कोई भागना मत" प्रेम मिमियाती आवाज़ में बोला लकिन ये क्या वो साया पास आया और अचानक वो साया प्रेम के पास पहुचते ही उसके पैरो में लेट गया। उसके मुँह से कुछ अस्पष्ट से स्वर निकल रहे थे जैसे कह रहा हो पवित्र, प्रेम डरते हुए थोडा पीछे हुआ और उसने मशाल को भूमि में गाड़ दिया, सब हैरान थे की ये क्या हुआ और वो साया जमीन पर प्रेम के पैरो में क्यों लोट गया, सभी अपने अपने कयास लगा रहे थे की अचानक से वो साया उठा और मशाल के पास जाकर बैठ गया हाथ जोड़ कर।ओह अब समझा मनी बोला, ये आग को प्रणाम कर रहा है और कह रहा है पवित्र। यार ये तो रात से भी ज्यादा काला है सोनी बोला।सही बोला सोनी भाई इसके आगे तो वेस्टइंडीज़ वाले गोरे है शांतुनु ने कहा, कद लगभग 6 फुट होगा और साले ने कपडे भी नही डाले पते लपेट रखे है।
गले में मालाये देखो सैंडी बोला, ओ रे भैया कालू भाई, अबे सुन ओ ब्लैक ब्यूटी, सैंडी ने उसको पुकारा उसने सैंडी की तरफ देखा और चल पड़ा उसकी तरफ अब हुई सैंडी की सिटीपीटी ग़ुम, अरे यहाँ मत आ काहे बुला लिया मुसीबत, रुक जा वही छू छु मत आ यहां सैंडी मरी सी आवाज़ में बोला। यो ससुरा इका नाम का ब्लैक ब्यूटी है जो ये सुनकर इधर आ रहा है तभी ब्लैक ब्यूटी ने सैंडी का हाथ पकड़ा और खिंच कर ले चला मशाल की तरफ। अरे बचाओ सैंडी मिमियाते हुये बोला, उसने सैंडी को कंधे से दबाव दे नीचे बिठाया और इशारे से हाथ जोड़ने को बोला, सैंडी ने हाथ जोड़े तभी वो बोला सबकी तरफ इशारा करके बाबा और अपने हाथ जोड़ लिए। सबके सब जमीन पर बैठ गए और सबने डर के मारे हाथ जोड़ लिए वो भयंकर गर्जना करते हुए बोला।उसके स्वर साफ नही थे। बाबा, पवित्र ना अपवित्र, माफ़ी, आज्ञा, सबको बस यही समझ आया। तभी वो ब्लैक ब्यूटी उठा और उसने खंडहर की और इशारा किया जाओ बाबा बचाओ। तभी वहा तेज हवा चलने लगी और पेड़ झूमने लगे, अचानक से काला धुआं आसमान से निचे उतरने लगा उसको देख वो ब्लैक ब्यूटी खंडहर की तरफ भागा और भागते हुए उसने सैंडी का हाथ पकड़ लिया सैंडी को साथ ले जाते देख सब उसके पीछे भागे और खण्डहर में घुस गए। बाहर से जो खंडहर टुटा फूटा था अचानक से बदल गया, अंदर का नज़ारा उतना ही शानदार वहाँ अंदर वो ब्लैक ब्यूटी सैंडी का हाथ पकडे खड़ा था एक मज़ार के पास, वो मज़ार की तरफ इशारा करते हुए बोला बाबा,फिर उसने बाहर की तरफ इशारा किया मौत,सब हैरान थे की ये कहना क्या चाहता है कोण हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो मनी चिलाया। उसने मनी की तरफ देखा और बोला मुम्बा सेवक बाबा तभी अचानक से बिजली कौंधी और मुम्बा गायब।
सबकी रूह तक काम्प् गयी ऐसा कैसे हो सकता है कोई अचानक से गायब कैसे हो सकता है। तब संजय ने बाहर देखा और बोला धूंआ गायब हो गया, सब धीरे से बाहर निकले तभी कुमार ने बस की तरफ देखा और भाग लिया , सभी कुमार के पीछे भागे, कुमार बस में चढ़ा और उसने ड्राईवर को देखा। ड्राइवर को देखकर सबके होश उड़ गए, ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके बदन का पूरा खून निचोड़ लिया हो,हैरानी की बात ये की शरीर पर कोई निशान नही। ड्राईवर को देख सबके होश फाख्ता हो गए तो। इसका मतलब उस ब्लैक ब्यूटी उर्फ़ मुम्बा ने हमे बचाया एंडी बोला,हा अगर वो नही होता तो हम सब मारे जाते अनुभव ने कहा, तो सभी एक काम करो अपना सामान समेटो और खंडहर के अंदर चलो किसी तरह रात निकले और हम सब इस जंगल से निकले मनी बोला,सबने जल्दी जल्दी सामान समेटा और खंडहर की तरफ भाग लिये। अब क्या करे चंद्रा बोला, पता नही मेरी कुछ समझ नही आ रहा मनी सिगरेट सुलगाता हुआ बोला, तभी सोनी ने बियर की बोतल मनी की तरफ बढ़ा दी, हरप्रीत ने भी शराब की बोतल उठाई और पेग बनाने लगा। डर और चिंता सबके चेहरों पर साफ दिखाई पड रही थी, सब पीने लगे लकिन इस बार डर को काबू करने के लिए ना की मजे के लिए, अचानक से बाहर फिर शोर गूंजा फिर से कालापन छा गया सबके चेहरे पे हवाइया उड़ने लगी सब मन ही मन ऊपर वाले को याद करने लगे तभी अचानक से खंडहर के उस कमरे में नीला प्रकाश फैल गया।
अब हुई मुसीबत बाहर गए तो मौत अंदर पता नही अब क्या होगा। तभी मुम्बा फिर से सामने आया लकिन इस बार उसकी आँखे लाल थी और हाथ में एक बड़ा सा तलवार जैसा दिखने वाला हथियार। अपमान सजा मुम्बा चिलाया, अपमान बाबा, अपमान, सब उसकी भयंकर आवाज़ सुनकर सिहर गए, अब काटो तो खून नही जब बचाने वाला ही मारने पे उतारू हो जाये तो क्या करे, अभी एक तरफ मुम्बा ने उनकी जान बचाई अब वो मारने पे उतारू है। मुम्बा ने अपना हथियार घुमाया ही था की अचानक नीला प्रकाश सफेद रंग में परिवर्तित हो गया सब डरे हुए थे। ये हो क्या रहा है? अविश्वसनीय,असंभव जो वहाँ घट रहा था , वो उन सबकी सोच से परे था। मुम्बा का भयानक रूप देख कर सबकी रक्त वाहिकाओं में रक्त जैसे सुख सा गया हो ऊपर से वो सफ़ेद रौशनी, कही कुछ नज़र नही आ रहा था। जैसे आँखे जड़ हो गयी हो , धीरे धीरे रौशनी एक केंद्र में समाने लगी और उसने धीरे धीरे एक साये का रूप ले लिया। उस साये को देखकर मुम्बा जमीन पर दंडवत हो गया मुम्बा को जमीन पर दंडवत देख सब के सब दंडवत हो गए। उठो तभी एक इंसानी आवाज़ गूंजी सब के सब उठ कर उस आवाज़ की और देखने लगे, एक सुंदरी चमकता हुआ मुखमंडल, लंबे केश उसने सफ़ेद रंग के कपडे को शरीर पर साडी की तरह लपेट रखा था। कोई भी ज्यादा देर तक उस सुंदरी के मुखमंडल की और नही देख पाया सबकी आँखे स्वयंम ही नीची हो गयी। हम पुष्पावती है बाबा ज्येष्ठ नाथ की पुत्री। ये जिस जगह आप सब खड़े हो ये उनका स्थान है,आप सब इस इस स्थान को अपवित्र किया है। अगर हमे आने में पल भर की और देर हो जाती तो आप सब अपने प्राणों से जाते। जी हमका माफ़ी दे दो सैंडी मिमियाते हुए बोला, जी हम सब सुबह होते ही चले जायेंगे पायल बोली, "नहीं जा सकते आप लोग" पुष्पवती बोली । उसकी बात सुनकर सबको तो काटो खून नहीं,क्यों क्यों नहीं जा सकते हम अनुभव बोला? क्योकि अब आप सब भी हमारी तरह इस काल खंड में फस गए हो, हम विवश है हमे माफ़ कीजिये पुष्पवती बोली।
ये काल खंड क्या है देवी कुमार हाथ जोड़ते हुए बोला, आपको इसकी जानकारी पिता जी ही देंगे आप सब चलिये मेरे साथ। इतना सुनकर सब एक दूसरे का मुंह ताकने लगे अब उनके पास कोई और चारा नही था सिवाय बात मानने के। अचानक पुष्पवती ने अपने हाथ को जैसे ही हवा में लहराया तो एक द्वार सामने आया सभी के सभी उस द्वार के पार हो गए, जैसे ही वो सब उस तरफ पहुंचे उनके आश्चर्य की सीमा न रही ये तो हूबहू वैसा ही है। सब कुछ वैसा ही प्रेम हैरान होते हुए बोला, अरे ओ कुमारवा कहि अइसन बात तो नही की वो पानी पीकर हम मर गए और उसके बाद तुम सब भी सैंडी कुमार से बोला, कुमार ने गुस्से से सैंडी की तरफ देखा काहे भड़कते हो हम तो कन्फर्म कर रहे थे खाली की हम जिंदा हु अभी सैंडी खिसियाते हुए बोला।तभी सैंडी के पैर पर कुछ जोर से लगा सैंडी चिलाने लगा, उई मर गवा ,हमरा प्राण निकल निकल जइबे, हा तो सैंडी अब यकीन हुआ जिन्दा हो तुम संजय हाथ में एक लकड़ी लहराते हुए बोला। अरे बुड़बक मारा काहे मुह से भी तो बता सकत हो, सब खामोश हो जाये बाबाजी की कुटिया सामने है पुषवती की आवाज़ आई। एकदम से सब शांत हो गए पुष्पवती कुटिया के अंदर गयी और तक़रीबन दस मिनेट के बाद बाहर आई। उसने मुम्बा को आवाज़ लगाई ,मुम्बा एकदम से आया जैसे हवा में से टपका हो। मुम्बा इन सबको आराम घर में ठहरा दो और खाने पानी का इंतज़ाम कर दो, आप दोनों मेरे साथ आईये पुष्पवती पायल और टीना से बोली ,वो दोनों बाकि सबकी तरफ देखने लगी शायद डर रही थी। पुष्पवती उनके डर को भांप गयी और बोली आप दोनों चिंता मत कीजिये हम सब आपके हितैषी है अगर आपको कोई नुकसान पहुंचाना होता तो आप सबको यहाँ नही लाते। तभी सैंडी ने पायल को आँखों ही आँखों में इशारा कर दिया और वे दोनों पुष्पवती के साथ चली गयी बाकि सब मुम्बा के साथ। मुम्बा उन्हें घासफूस से बनी एक झोपडी में ले गया झोपडी के अंदर घासफुस के बिछौने थे और एक कोने में पानी का मटका रखा हुआ था। ओ भाई मुम्बा खाने को भी बोला था देवी ने "शांतुनु बोला " मुम्बा ने शांतुनु की तरफ देखा,मैं कह रहा था अगर नही है तो भी चलेगा शांतुनु डरते हुए बोला, मुम्बा बाहर को चला गया। अबे काहे इस ब्लैक ब्यूटी से पंगा लेता है कही फिर से गुस्से में आ गया तो गयी जान। सही है कम से कम जिन्दा तो है कुमार बोला। वो सब वहा लेट गए तक़रीबन बीस मिनेट बाद दो लोग आये और एक बड़ी सी तश्तरी में काफी सारे फल और एक मटका वहा रख के चले गये।
सैंडी ने मटके के ऊपर का कपडा हटाया और बोला इसमें तो लाल पानी है हम नही पिऊँगा कही फ़ोकट में प्राण चले जाये। सोनी उस मटके के पास आया और उसने उसमे से वो पानी एक कटोरे में डाला और पी गया। वाह वाह लज्जतदार,ऑसम,सोनी चिला उठा, ऐसा पानी या शरबत, जिंदगी में आज तक नही पिया। अब सब टूट पड़े जी भर के सबने वो लाल पानी पिया और फल खाये उसके बाद सब लेट गए और निद्रामग्न हो गए। दो घंटे बाद दरवाजे पर दस्तक हुई हरप्रीत की नींद खुल गयी उसने सबको जगाया, शांतुनु ने दरवाजा खोला तो देखा सामने वही दो लोग थे उनके हाथ में कुछ वस्त्र थे। आप सब लोग स्नान कर लीजिये उसके बाद बाबाजी आपसे मिलेंगे और हा उस तरफ पानी का तालाब है वहा चले जाइये और ये वस्त्र आप सब के लिए। शांतुनु ने उनसे वस्त्र लिए और वो दोनों चले गये।
अब आगे।👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍
अब सभी नहाने चल दिये तालाब पर। तालाब का पानी एकदम साफ मानो की किसी ने शीशा बिछा दिया हो।सभी तालाब के पानी मे उत्तर गए और नहाने लगे। एकदम से सैंडी चिलाया, बचाओ बचाओ मुझे मगरमछ ने पकड़ लिया,सब सैंडी की तरफ भागे,एंडी ने तुरंत पानी मे डुबकी लगाई और देखा,की एंडी की लात एक पौधे में अटकी हुई थी।एंडी ने उसे निकाला और बोला,क्या सैंडी इतना चिलाया,एक पौधे में अटक हुआ था।साला डरपोक सबकी फाड़ दी।सभी ने नहा कर कपड़े डाले और वापिस चल दिये।वो अभी कुटिया के मुहाने पर पहुंचे ही थे कि सामने से पायल ओर तीन आती दिखाई दी।क्या ग़जब लग रही थी दोनो नीले रंग की साड़ी में।पायल को देख तो सैंडी बावला से हो गया और उधर टीना को देख एंडी।
इससे पहले की वो कोई बात करते कि अचानक से मुम्बा प्रकट हुआ और बोला।बाबा बुलाये,चलो सब।
ओर सब मुम्बा के पीछे चल दिये।मुम्बा कुटिया के पास आकर रुक ओर लोप हो गया।ये देखकर सैंडी बोला ससुरा पता नही कहा से आवत है और कहाँ जावत है।इतने में पुष्पवती ने कुटिया का दरवाजा खोला और सामने आई।आप लोग अंदर बैठे पिताश्री आते ही होंगे।इतना बोलकर पुष्पवती लोप हुई। सभी कुटिया के अंदर गए और बैठ गए।
थोड़ी देर में बाबा ज्येष्ठ नाथ का आना हुआ साथ मे उनके पुष्पवती भी थी। बाबा के चेहरे पर एक नूर था उनकी तरफ कोई टकटकी लगाए नही देख सकता था।उनको देखबकर सब खड़े हो गए।।बैठो बच्चो। बाबा बोले।
सभी बैठ गए । आप सबको हमारे बारे तो बताया ही होगा हमारी पुत्री पुष्पवती ने। जी बाबा सभी बोले एक साथ।
ओर ये भी बताया होगा कि अब आप सब लोग इस कालखंड में फस गए है।
जी बाबा बोले सभी।
कालखंड, ये माया है उस दुष्ट की।
कौन बाबा सब एकसाथ बोल पड़े। नागर नाथ। एक ऐसा दुष्ट जिसे अपने स्वार्थ के इलावा कुछ नज़र नही आता था। शक्तियों के लालच में उसने गुरु वचन भंग किया। डेरे के विरुद्ध जाकर मासूम लोगो का नरसंहार किया,उनकों लुटा,उनकी बलि चढ़ाई यही नही उसने अपने परिवार को भी बलि चढ़ा दिया। उसका ये रूप देख हमे अपनी तपस्या से उठना पढ़ा और उसका सामना करना पड़ा।
इससे पहले की हम उसके वजूद को चुनोती दे पाते उसने हमारी बेटी का अपहरण कर लिया और हमे विवश कर दिया।
आप जिस पुष्पवती को देख रहे हो ये इस कालखंड के प्रभाव के कारण है वरना ये तो सिर्फ अभी कुछ महीनों की है।
इतना सुनकर सब के मुंह खुले के खुले रह गए। क्या बाबा सब एक स्वर में बोले।
बच्चों हम उसकी माया के प्रभाव में आकर अपने काल यानी कि समय से बहुत दूर आ गए है।हमारे ये शरीर सिर्फ ऊर्जा से संचरित है,ओर ऊर्जा से बने हुए है। आपकी भाषा मे इसे आत्मा कह सकते हो। हमारी देह आज भी हमारे आश्रम में है जो कि नागर नाथ की निगरानी में है।
आप सबका जन्म एक कार्य पूर्ण के लिए हुआ है अब आप सब ही है जो हमे मुक्ति दिला सकते है और खुद भी यहाँ से मुक्त हो सकते है।
क्या बाबा , हम अधने से मानव क्या कर सकते है,जबकि आप इतने समर्थ हो।
कुमार बोला।
बेटा मैं समर्थ था लेकिन अब नही।मेरा शरीर और शक्तियां सब कीलित है।अगर आप लोग ये कीलन हटा दो तो मैं सब करने में समर्थ हु।इसके इलावा मेरे पास कोई चारा नही है।
इतना सुनते ही सबके दिमाग गड़बड़ा गए। बाबा हम सब ये काम कैसे कर सकते है, हम तो साधारण मानव है आप लोगो की तरह नही। अनुभव बोला।
वक़्त का लिखा कभी गलत नही होता। आप सबका यहाँ तक पहुंचना ही इस बात का प्रमाण है कि आप सब चुने गए हो उस ईश्वर द्वारा।ये कार्य आप सब के द्वारा ही सम्पूर्ण होगा। मुम्बा हर वक़्त आप लोगो के साथ रहेगा। अरे तेरी, एक तो पता नही क्या हटाना है, ऊपर से ई ससुरा साथ होगा, सैंडी बोला। कुमार ने उसे चुप रहने का इशारा किया।
आप सबको तयार होना पड़ेगा , जिस प्रकार आप सब इस आयाम में आये हो उसकी प्रकार आप सबको वहाँ जाना होगा। यही एक रास्ता है मुक्त होने का या ये कह लो कि तुम सब की नियति यही है।
तुम सबसे पहले बहुत लोग यहाँ आये लेकिन कोई जिंदा नही बचा, तुम सबका जिंदा होना ही किसी चमत्कार से कम नही है। बाबा बोले।
ठीक है बाबा जैसा आप कहे अनुभव बोला। सबने बाबा को प्रणाम किया और बाहर चले गए। पुत्री एक बात मेरे मन को खाये जा रही है बाबा बोले,क्या पिताश्री ? पुत्री जब इन्हें ये मालूम होगा कि ये लोग जहाँ पर जा रहे है , जिनसे इनका सामना है वो इनके ही रूप है ,लेकिन अलग समय और अलग काल मे तो क्या होगा। ये रहस्य हम इन्हें बता नही सकते हम विवश है। पिताश्री ये सब नियति का खेल है, इनका यहाँ आना, अब आगे जाना सब पहले से ही तय था। आप परेशान मत होइए, जैसी ऊपर वाले कि इच्छा।
इधर विश्राम स्थल में पूरी प्रेत मंडली गहन विचार में डूबी हुई थी। देखो यारो हम तो वैसे भी ना इधर के ना उधर के, तो क्यो न कोशिश की जाए एंडी बोला। तुम पागल हो गए क्या जानबूझ के मौत के पास जा रहे हो मनी बोला। अरे मनी मर तो हम वैसे भी गए थे। अगर बाबा ना बचाते, तो क्यो ना अब उनका साथ दिया जाए। सैंडी ने कहा। पायल ने सैंडी का समर्थन किया और टीना ने भी एंडी का।बाकी प्रेत हरप्रीत,चंद्रा,अनुभव,कुमार,प्रेम, रजत सब राजी थे।मनी भी अनमने मन से सबके साथ हो गया।
अभी वार्तालाप चल ही रहा था कि मुंबा प्रकट हुआ। चलो सबको बाबा ने बुलाया है वक़्त हुआ अब जाने का।सब मुम्बा के साथ चल दिये। मुम्बा उन्हें लेकर एक बहुत बड़े पेड़ के पास पहुंचा और जैसे ही उसने पेड़ को छुआ तो पेड़ में से रास्ता खुलने लगा अंदर जाने का। ये सब देख सैंडी घबराया, मुम्बा ने उसकी तरफ देखा अचानक ओर बोला डरो नही इतना कह कर वो सभी उस पेड़ में प्रवेश कर गए।जैसे ही वो दूसरी तरफ पहुंचे तो उन्होंने देखा कि मुम्बा का रूप बदल गया था। छह फुट लंबा कसा हुआ शरीर और मालाएं धारण किये हुए।मुम्बा को देख सभी अचंबित हो गए।सबको विस्मित देख मुम्बा बोला मित्र ये हमारा असली रूप है ।
क्रमश: अगला पार्ट जल्द ही।
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